कुल्लू/ मनमिन्दर अरोड़ा: हिमाचल प्रदेश सरकार के द्वारा 28 सितंबर को कैबिनेट की मीटिंग रखी गई है। अब इस मीटिंग पर एक बार फिर से किरतपुर मनाली फोरलेन प्रभावितों की निगाहें टिक गई है। वहीं कैबिनेट की बैठक में अगर फोरलेन प्रभावितों की मांगों पर सरकार के द्वारा विचार किया गया तो प्रभावितों के द्वारा सरकार का स्वागत किया जाएगा। वरना वोट पर चोट की रणनीति भी फोरलेन प्रभावितों के द्वारा बना ली गई है।कुल्लू में जिला कुल्लू फोरलेन संघर्ष समिति की बैठक में यह तय कर लिया गया कि अब प्रभावित सिर्फ 28 सितंबर को होने वाली कैबिनेट मीटिंग का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में अगर सरकार उनके हक में फैसला देती है तो वह सरकार का साथ देंगे।
हिमाचल प्रदेश के 48 विधानसभा क्षेत्रों में वोट पर चोट अभियान भी चलाया जाएगा। कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए फोरलेन संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष दिनेश सेन ने कहा कि साल 2015 से लगातार प्रभावित सरकार के समक्ष अपनी मांगों को रख रहे हैं । कैबिनेट स्तर पर भी सरकार के द्वारा उनकी मांगों को सुनने के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। लेकिन सरकार आज तक कोई ठोस फैसला नहीं ले पाई है। दिनेश सेन का कहना है कि फोरलेन प्रभावित लगातार अपनी मांगों को लेकर सरकार के साथ वार्ता कर रहे हैं, क्योंकि उनकी सभी मांगे पूरी तरह से जायज है।
फोरलेन बनने के चलते कई किसान बेरोजगार हो गए तो वहीं कई दुकानदारों को भी इसका खामियाजा उठाना पड़ा है। ऐसे में अब सभी प्रभावितों को 28 सितंबर की कैबिनेट बैठक का इंतजार है। उन्होंने प्रदेश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर 28 सितंबर की बैठक में भी कोई हल नहीं निकाला गया। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 48 विधानसभा क्षेत्रों मे वोट पर चोट अभियान चलाया जाएगा।। विस्थापितों की मांगों को अनसुना करने का खामियाजा भाजपा सरकार को भुगतना होगा।
