शिमला: कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिलासपुर में एम्स का उद्घाटन करने और एक जनसभा को संबोधित करने के लिए पहुंच रहे है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए है। कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे को लेकर तीखे सवाल मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से पूछे है।
सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मुख्यमंत्री से पूछा हैं कि मुख्यमंत्री जनता को बताएं, प्रधानमंत्री ने आठ साल के कार्यकाल के दौरान किए दौरों में हिमाचल के लिए कौन सी बड़ी घोषणा की है। मुख्यमंत्री प्रदेश का कितना कर्ज प्रधानमंत्री जी से माफ करवाएंगे। प्रदेश 65 हजार करोड़ रुपए से अधिक कर्ज के तले दबा हुआ है। उन्होंने कहा कि हिमाचल में जन्म लेने वाला हर बच्चा कर्जदार पैदा हो रहा है। मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री से प्रदेश के लिए विशेष वित्तीय पैकेज लेना चाहिए, जिससे कि पहाड़ी प्रदेश की वित्तीय हालत सुधर सके।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री हर दौरे पर हिमाचल को अपना दूसरा घर बताते हैं, यहां के लोगों से प्यार भी जताते हैं, लेकिन झोली हर बार खाली छोड़ चाहते हैं। इस बार के दौरे से प्रदेश वासियों को काफी उम्मीदें हैं। मुख्यमंत्री उनसे प्रदेश के लिए विशेष पैकेज मांगें। केवल लोगों को चुनावी चासनी में ही न लपेटें।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में 14 लाख बेरोजगार युवा हैं। उन्हें रोजगार मुहैया करवाने के लिए औद्योगिक पैकेज लिया जाए ताकि रियायतों के साथ नए उद्योग लगें और युवाओं को रोजगार मिले। आज प्रदेश में बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है। इस कारण ही युवा पथभ्रष्ट होकर नशे को अपनाकर अपराध की दुनिया में कदम रख रहे हैं। महंगाई कम करने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार की क्या योजना है, यह भी आम जनता को बताया जाए, क्योंकि, बीते आठ साल में महंगाई ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
सुक्खू ने कहा कि मुख्यमंत्री यह भी जवाब दें कि शिमला-मटौर समेत घोषित 69 नेशनल हाईवे और फोरलेन का क्या हुआ? कितनों को सरकार ने सिरे चढ़ाया और कितने जुमला साबित हुए। सुक्खू ने पूछा हैं कि केंद्र सरकार विदेशी सेब पर आयात शुल्क कब बढ़ाएगी। सेब उत्पादक किसानों को कोई भी राहत देने में केंद्र व प्रदेश सरकार नाकाम रही है। सेब की खेती करने वाले किसान हर साल नुकसान झेल रहे है। सेब खरीद के लिए भी एमएसपी तय होनी चाहिए ताकि किसानों को यह आस बनी रहे कि कम से कम इतना रेट तो उन्हें फसल का मिलना ही है।
