हिमाचल/चन्द्रिका: कोरोना के दो साल बाद हिमाचल में इस बार दशहर पर्व मनाया जाएगा। बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व दशहरा पिछले दो वर्षो में प्रदेश के कई स्थानों पर नहीं मनाया गया था, वहीं कुछ स्थानों पर कोरोना के मददेनजर इसे प्रतिकात्मक तौर पर ही मनाया गया था। अब कोरोना जैसी बुराई पर भी काफी हद तक जीत पाई गई है, ऐसे में इस वर्ष दशहरा उत्सव फिर से पहले के अंदाज में मनाया जा रहा है। इसे लेकर कई दिनों पहले ही तैयारी कर दी गई थी। अगर बात की जाए हिमाचल के प्रसिद्ध एंव अंतराष्टीय कुल्लू दशहरा की तो यह भी इस बार बड़े स्तर पर मनाया जा रहा है। हालांकि कुल्लू में पिछले वर्ष भी दशहरा उत्सव मनाया गया था और भगवान रघुनाथ की यात्रा भी निकाली गई थी, लेकिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन नहीं हो पाया था। जबकि इस बार यहां अंतरराष्ट्रीय दशहरा पर्व पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होने जा रहे हैं।

ये कार्यक्रम सात दिनों तक आयोजित होगा। यहीं नहीं कुल्लू दशहरा में इस बार महानाटी भी आकर्षण का केंद्र होगी, जिसमें हजारों महिलाएं एक साथ नाटी करती हुई नजर आएंगी। इसके अतरिक्त प्रदेश के अन्य स्थानों पर भी दशहरा उत्सव मनाया जा रहा है। इस पर्व को लेकर लोग भी काफी उत्साहित हैं।इसका आगाज मंगलवार से ही हो गया है। राजधानी शिमला की बात की जाए तो यहां प्रसिद्ध जाखू मंदिर में पिछले दो वर्षों से दशहरा पर्व एक प्रतिकात्मक तौर पर मनाया गया यानी की बडे स्तर पर अकसर यहां दशहरा पर्व आयोजित होता था लेकिन कोरोना के चलते पिछले दो वर्षों में यहां बडे स्तर पर आयोजन नहीं हो पाया। वहीं शिमला के समरहिल और बालुगंज में भी दशहरा पर्व कोरोना के चलते पिछले दो वर्षों में नहीं मनाया गया था। इसके अलावा सोलन के प्रसिद्ध ठोडो मैदान में भी दशहरा उत्सव दो वर्षों बाद मनाया जाएगा। इसके लिए यहां जोरो शोरो से तैयारियां की जा रही है।

दशहरा में दिखेगा राजनीतिक रंग
दशहरा पर्व की अपनी एक विशेषता है, जिसे बुराई पर अच्छाई की जीत कहा जाता है। वहीं इस पर्व पर कई राजनेता भी शामिल होते हैं। इस बार प्रदेश मेंं आगामी चुनावो को देखते हुए राजनेताओं के लिए दशहरा उत्सस कई मायनो मेंं खास रहने वाला है।

