नाहन/देवेन्द्र कुमार –कुंवर अजय बहादुर सिंह किसी परिचय के मोहताज नहीं है। शाही परिवार से संबंध रखने वाले कुंवर अजय बहादुर सिंह का जन्म 7 अक्टूबर 1947 को अपने ननिहाल मकरानी मध्यप्रदेश में हुआ। उनका राजनैतिक सफर 1972 से शुरू हुआ था। कुंवर अजय बहादुर सिंह ने 1972 में कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। जिसके बाद उन्हें युवा कांग्रेस का जिला अध्यक्ष चुना गया। इसके बाद उन्हें युवा कांग्रेस का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। कुछ अर्से के बाद उन्हें युवा कांग्रेस का राज्य अध्यक्ष के पद पर तैनात किया गया। पराजय बहादुर सिंह के सेवा कार्य को देखते हुए इसके बाद उन्हें सेवादल का राज्य अध्यक्ष भी नियुक्त किया गया। अपने राजनीतिक सफर में आगे बढ़ते हुए और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने उन्हें 1985 में नाहन विधानसभा क्षेत्र से पहली बार टिकट दिया।
अपने इस चुनाव में उन्होंने विजय हासिल की और पहली बार 1985 में नाहन विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने। इसके बाद 1990 के दशक में उन्हें पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड का चेयरमैन बनाया गया। वो हिमफैड के चेयरमैन भी चुने गए। कांग्रेस पार्टी द्वारा उन्हें प्रदेश का उपाध्यक्ष भी बनाया गया। बता दे कि गत वर्ष उन्हें जिला कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था। कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष के तौर पर उन्होंने पार्टी को अपनी सेवाएं जून 2022 तक दी। वर्तमान समय में भी कुंवर अजय बहादुर सिंह कांग्रेस पार्टी के सिपाही के तौर पर कार्य कर रहे हैं।
शाही परिवार से संबंध रखने के बावजूद भी बचपन से अनुशासन में रहे
कुंवर अजय बहादुर सिंह के पिता का नाम महाराज जगत सिंह बहादुर और माता का नाम रानी लीला देवी था। उनके एक छोटे भाई हैं जिनका नाम कुंवर अभय सिंह बहादुर है। यह दोनों भाई अपने परिवार के साथ अपने पुश्तैनी महल रन जोर पैलेस नाहन में रहते हैl
शाही परिवार से संबंध रखने के बावजूद भी उनका बचपन बहुत ही अनुशासन में बीता। उनकी स्कूली शिक्षा शिमला के एडवर्ड स्कूल में हुई जबकि उन्होंने स्नातक की उपाधि एसडी कॉलेज शिमला से प्राप्त की। क्योंकि कुंवर अजय बहादुर सिंह शाही परिवार से संबंध रखते थे और अनुशासन बचपन से ही उन्हें विरासत में मिला था इसलिए उन्होंने पहले सिख रेजीमेंट(1st Sikh Regiment) में सैन्य कला की ट्रेनिंग प्राप्त की।
कुंवर अजय बहादुर सिंह का निजी जीवन
कुंवर अजय बहादुर सिंह की पत्नी का नाम कविता सिंह है। उनका एक ही पुत्र हैं जिनका नाम कुंवर बलभद्र सिंह है।कुंवर बलभद्र सिंह ने शिमला से स्नातक की उपाधि हासिल की है। कुंवर राज बहादुर सिंह को इतिहास और साहित्य को पढ़ना,शास्त्रीय संगीत सुनना, ट्रैकिंग करना, खाना पकाना और गेम आदि खेलना पसंद है।
