मंडी/धर्मवीर -:क्या आपने कभी चीड़ के पेड़ से निकलने वाले विरोजे से बनी मोमबत्ती का इस्तेमाल किया है। और क्या कभी मधुमक्खियों की हांडी के बाहरी आवरण, लौंग, दालचीनी और कमल की खुशबू वाले दीए जलाए हैं। शायद आपको सुनने में कुछ अटपटा लगे, लेकिन स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं इस दीपावली आपके के लिए ऐसे ही उत्पाद लेकर बाजारों में आई हुई हैं। पेश है एक रिपोर्ट।
दीपावली को लेकर बाजारों में रौनक बढ़ने लग गई है। एक तरफ जहां बाजारों में तरह-तरह के इलेक्ट्रॉनिक और विदेशी उत्पाद लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं, वहीं छोटी काशी मंडी के सेरी मंच पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने भी घरेलू उत्पादों के दम पर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना शुरू कर दिया है। हर बार त्यौहारों के दौरान कुछ नया पेश करने वाली नैणा ऑर्ट एंड क्रॉफ्ट स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस बार भी कुछ नया और हटकर करने की कोशिश की है। समूह की प्रधान संतोष सचदेवा ने बताया कि दीपावली पर इस बार उनके ग्रुप की महिलाओं ने चीड़ के पेड़ से निकलने वाले विरोजे का इस्तेमाल करके मोमबत्ती बनाई है। इसमें सोया वैक्स और मधुमक्खियों की हांडी के बाहरी आवरण का इस्तेमाल भी किया गया है। इसके अलावा लौंग, दालचीनी, कमल और अन्य खुशबू से महकने वाले दीए भी बनाए हैं। भीमसेनी कपूर का इस्तेमाल करके अरोमा कैंडल बनाई है जो सर्दियों मंे बच्चों के स्वास्थ्य को भी ठीक रखने में मददगार साबित होता है।
केंद्र सरकार की योजनाओं से लिया प्रशिक्षण
संतोष सचदेवा ने बताया कि उन्हें भारत सरकार के हस्तशिल्प मंत्रालय की योजनाओं के माध्यम से इस तरह के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस प्रशिक्षण के दम पर ही वह इस तरह के उत्पादों को बनाकर बाजारों तक ला पाती हैं। इस समूह में 30 महिलाएं घर पर ही इस तरह के उत्पाद बनाने का कार्य करती हैं। महिलाओं ने कच्ची मिट्टी, गोबर और टैराकोटा का इस्तेमाल करके दीपक भी बनाए हैं। उन्होंने बताया कि यदि कोई इस तरह का प्रशिक्षण लेकर खुद यह उत्पाद बनाना चाहे तो वह उनसे संपर्क कर सकते हैं। सभी को यह प्रशिक्षण निशुल्क दिया जाएगा।
इको फ्रेंडली प्रॉडक्ट खींच रहे लोगों का ध्यान
स्वयं सहायता समूहों द्वारा पेश किए गए यह इको फ्रेंडली प्रॉडक्ट लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। खरीददार कंचन ठाकुर ने बताया कि उन्होंने प्रॉडक्ट की विस्तार से जानकारी ली तो वह काफी हैरान हुई कि किस तरह से प्राकृतिक वस्तुओं का इस्तेमाल करके यह प्रॉडक्ट बनाए गए हैं।
वोकल फॉर लोकल का नारा हो रहा चरितार्थ
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काफी समय पहले वोकल फॉर लोकल का जो नारा दिया है, वह इस तरह के प्रयासों से चरितार्थ होता हुआ नजर आ रहा है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस दीपावली पर लोग इन महिलाओं की मेहनत और प्रयासों की अहमियत को समझते हुए वोकल फॉर लोकल के नारे को और प्रगाढ़ करेंगे।

