शिमला, संजू। भाजपा विधायक एवं प्रदेश मीडिया प्रभारी रणधीर शर्मा ने कैंसर की 397 दवाओं की कीमतों में कटौती को मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत बताया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के इस फैसले से कैंसर के इलाज पर होने वाला खर्च कम होगा। वहीं, उन्होंने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर केंद्र से स्वीकृत स्वास्थ्य परियोजनाओं और आपदा पुनर्निर्माण के लिए मिली राशि के उपयोग में लापरवाही बरतने के आरोप लगाए।
29 अक्टूबर को शिमला में आयोजित प्रेस वार्ता में रणधीर शर्मा ने बताया कि 27 अक्टूबर को जारी संशोधित मूल्य सूची के अनुसार, कैंसर से संबंधित 543 दवाओं में से 397 की अधिकतम खुदरा कीमतों में कमी की गई है। उन्होंने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा का आभार जताया। उनके अनुसार, पाल्बोसिक्लिब 125 एमजी की एक दवा की कीमत 40,421 रुपये से घटकर 2,730 रुपये रह गई है। इसी तरह पाल्बोसिक्लिब 100 एमजी की कीमत 24,505 रुपये से घटकर 2,069 रुपये और थायोटेपा 100 एमजी की कीमत 80,072 रुपये से घटकर 7,150 रुपये हो गई है। उन्होंने कहा कि महंगे इलाज के कारण आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे परिवारों को इससे राहत मिलेगी।
रणधीर शर्मा ने कहा कि केंद्र सरकार ने हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 320 अतिरिक्त स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों को मंजूरी दी है। इसके लिए करीब 415 करोड़ रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार केंद्र की योजनाओं का श्रेय लेने का प्रयास कर रही है, जबकि 1,422 करोड़ रुपये की स्वीकृत जायका स्वास्थ्य परियोजना को आगे बढ़ाने में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत क्रिटिकल केयर ब्लॉक और ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयों के निर्माण की गति पर भी सवाल उठाए। इसके अलावा, उन्होंने 15वें वित्त आयोग के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए स्वीकृत 521 करोड़ रुपये के उपयोग को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
भाजपा विधायक ने ऊना में प्रस्तावित बल्क ड्रग पार्क की परियोजना में देरी और मेडिकल डिवाइस पार्क परियोजना से पीछे हटने के फैसले को लेकर भी प्रदेश सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं से राज्य में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ सकते थे।
आपदा पुनर्निर्माण के 2,006 करोड़ रुपये के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
रणधीर शर्मा ने आपदा पुनर्निर्माण के लिए पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (पीडीएनए) के तहत स्वीकृत करीब 2,006 करोड़ रुपये की सहायता राशि के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में आपदा प्रभावित क्षेत्रों की सड़कों और बुनियादी ढांचे की बहाली का काम अपेक्षित गति से नहीं हो रहा, जबकि इस राशि से जुड़े कार्यों के आवंटन और भुगतान में पारदर्शिता की कमी की शिकायतें हैं।
उन्होंने दावा किया कि पहले एक लाख रुपये से अधिक के कार्यों के लिए ऑनलाइन निविदा की व्यवस्था थी, लेकिन पीडीएनए के कार्यों में यह सीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई। उनके अनुसार, इससे कार्यों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पसंदीदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने की आशंका है। उन्होंने पांच-पांच लाख रुपये के कार्यों के आवंटन और भुगतान की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। साथ ही, विधानसभा क्षेत्रवार स्वीकृत कार्यों, ठेकेदारों, निर्माण की स्थिति और भुगतान का विवरण सार्वजनिक करने की मांग उठाई।
उन्होंने कहा कि शिकायतों वाले कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आपदा राहत की राशि निर्धारित उद्देश्यों के अनुसार खर्च हो रही है या नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस समर्थित ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, हालांकि इन आरोपों के समर्थन में प्रेस वार्ता के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों का विवरण उपलब्ध नहीं कराया गया।
पंचायतों के अनुदान के इस्तेमाल पर भी जताई आपत्ति
रणधीर शर्मा ने 15वें वित्त आयोग के तहत पंचायतों को मिलने वाले अनुदान के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पेयजल से संबंधित टाइड ग्रांट की राशि पंचायतों के बजाय जल शक्ति विभाग को सौंप दी गई और कुछ धनराशि का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों से अलग किया गया। उन्होंने मांग की कि 16वें वित्त आयोग के तहत मिलने वाली राशि पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के माध्यम से निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार खर्च की जाए।
रणधीर शर्मा ने कहा कि केंद्र से मिलने वाली स्वास्थ्य और आपदा सहायता प्रदेश की जनता के हित में है और इसका पारदर्शी तरीके से उपयोग होना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर संतोषजनक जवाब नहीं दिया और स्थानीय निकायों के अधिकारों की अनदेखी जारी रही, तो भाजपा जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर इस मुद्दे को विधानसभा और जनता के बीच उठाएगी।
