शिमला,संजु चौधरी(TSN)-हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन प्रशासन संस्थान का मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज रोचक निरीक्षण किया.इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने तमाम व्यवस्थाओं का जायजा लिया।मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने आज हिमाचल प्रदेश लोक प्रशासन संस्थान (हिप्पा),शिमला की स्थापना के 50 वर्ष पूर्ण होने पर संस्थान का नाम पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय डॉ.मनमोहन सिंह के नाम पर रखने की घोषणा की।उन्होंने हिप्पा में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह को श्रद्धांजलि भी अर्पित की और कहा कि उनकी दुरदर्शी नीतियों के कारण देश के लोग आत्म-सम्मान के साथ खड़े हैं और हिमाचल प्रदेश के विकास में भी उनका विशेष योगदान रहा है।उनके प्रयासों से हिमाचल प्रदेश में अनेक बड़े संस्थान खुले,जिसका लाभ आज प्रदेश के लोगों को मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर हिप्पा की एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय मनमोहन सिंह एक ऐसी शख्सियत थी, जिन्होंने उस समय देश को आर्थिक संकट से बाहर निकाला जब देश बदहाली की ओर चल रहा था।मनमोहन सिंह ऐसे अर्थशास्त्री थे,जिन्होंने अपनी बुद्धिमत्ता से देश को आर्थिक मंदी के दौर से बाहर निकाल कर खुशहाली की ओर लेकर गए।
पूर्व सरकारों का कर्जा चुकाने के लिए ही 28000 करोड़ का लिया जा रहा कर्जा
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि सरकारों की देनदारियां चुकाने के लिए वर्तमान सरकार को कर्ज ही लेना पड़ता है.जिसके चलते हमने भी अपने 2 साल के कार्यकाल में अब तक ने 28000 करोड़ का कर्ज़ पुरानी सरकार की देनदारियां और ब्याज चुकाने के लिए कर्जा लिया है।10000 करोड़ का हमने ब्याज का चुकता किया और 8000 करोड़ हमने मूलधन चुकाने के लिए कर्ज। जबकि पिछली सरकार में 350 हजार करोड़ का 2022 तक जीएसटी का सेस भी आता रहा तब भी पिछली सरकार ने फिजिकल डिफिसिट और फिजिकल प्रूडेंट के चलते आर्थिक मंदी को सुधारने की कोई कोशिश नहीं की।उन्होंने कहा कि हर सरकार को प्रदेश हित की ओर कार्य करना चाहिए ताकि हिमाचल प्रदेश अपने पैरों पर खड़ा हो सके हमारी सरकार इस और कार्य कर रही है ताकि हिमाचल प्रदेश 2032 तक आत्मनिर्भर हिमाचल बन सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के साथ पंचायती राज मंत्री अनुरोध सिंह,शिमला शहर महापौर सुरेंद्र चौहान,उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप,पुलिस अधीक्षक संजीव गांधी मौजूद रहे ।
