संजु चौधरी, शिमला: प्रदेश की फल मंडियों में सेब ने अपनी दस्तक दे दी हैं। मंडियों में सेब सीजन टाइडमेन सेब की एंट्री के साथ धीमी गति से शुरू हो गया हैं। बागवान सेब को लेकर मंडी पहुंचना शुरू हो गए हैं।
शुक्रवार को राजधानी शिमला स्थित ढली फल मंडी में सेब की बोली लगी। जहां प्रदेश सरकार की ओर से की गई नई व्यवस्था के तहत पहली बार सेब किलो के हिसाब से खरीदा गया। सेब मंडियों में किलो के हिसाब से बिकना तो शुरू हो गया है लेकिन इस नई व्यवस्था ने बागवानों के सामने नई समस्याएं खड़ी कर दी है ऐसे में आढ़ती व बागवान दोनों नई व्यवस्था से नाखुश नजर आ रहे हैं। आढ़तियों का कहना है कि सेब को किलो के हिसाब से खरीदना संभव नहीं हैं क्योंकि बागवान सरकार की ओर से तय मानदंडों से ज्यादा सेब भरकर ला रहे हैं,लेकिन आढ़ती 24 किलो से ज्यादा खरीद नहीं सकता । वहीं बागवानों का भी कहना है कि किलो के हिसाब से खरीदने की नई व्यवस्था में बिना यूनिवर्सल कार्टन के बागवानों को भी नुकसान हो रहा हैं। सेब पेटी में 24 किलो से ज्यादा आ रहा है लेकिन आढ़ती 24 किलो के हिसाब से ही खरीद रहा हैं।
ढली फल मंडी में आढ़ती ज्ञान सिंह का कहना है कि सरकार के दिशा निर्देशों के अनुसार मंडी में इस बार सेब किलो के हिसाब से बिक रहा है और आज की बात करें तो आज फल मंडी में टाइडमेन सेब 40 से 100 रु प्रतिकिलो बिका लेकिन इस वर्ष सेब को किलो के हिसाब से खरीदना संभव नही हैं। आढ़ती का कहना है कि बागवान बिना बजन किए सेब मंडी ला रहे है ,लेकिन सरकार ने आढ़तियों के लिए मानदंड तय किए हैं जिसमें आढ़ती 24 किलो से ज्यादा सेब नहीं खरीद सकता, इसलिए वो सरकार की ओर से तय मापडंडों के अनुसार खरीद कर रहे है लेकिन बागवान मानदंडों से ज्यादा सेब भर कर पेटी में ला रहा हैं।
उनका कहना है कि बिना यूनिवर्सल कार्टन के सेब को किलो के हिसाब से ख़रीदना संभव नहीं हैं। उन्होंने सरकार से भी मांग की है सरकार बागवानों पर भी दवाब डाले की वो सेब को 24 किलो के हिसाब से पेटी में भरकर लाएं ।
वहीं सेब लेकर मंडी पहुंचे बागवान का कहना भी है कि बिना यूनिवर्सल कार्टन सेब को किलो के हिसाब से बेचने में बागवानों को नुकसान हो रहा हैं। पेटियों में सेब 28 से 32 किलो तक आ रहा है लेकिन आढ़ती 24 किलो के हिसाब से खरीद रहा हैं जिससे बागवानों काफी नुकसान हो रहा हैं। सरकार या तो यूनिवर्सल कार्टन लागू करें नहीं तो सेब पेटियों के हिसाब से पुरानी व्यवस्था के तहत बिकना चाहिए ताकि बागवानों को नुकसान ना हो।
