शिमला-: देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरक शक्ति रहा है, जिसने देशवासियों में मातृभूमि के प्रति समर्पण, साहस और त्याग की भावना को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि इस अमर रचना ने देशभक्ति को जन-जन का नैतिक दायित्व बनाया और स्वतंत्रता सेनानियों की कई पीढ़ियों को संघर्ष के लिए प्रेरित किया।उपराष्ट्रपति ने यह विचार भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), शिमला में आयोजित ‘वंदे मातरम् की यात्रा’ विषयक स्थायी प्रदर्शनी तथा ‘सरदार पटेल का दृष्टिकोण : एकीकरण, एकता और संघवाद’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन अवसर पर वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए व्यक्त किए। प्रतिकूल मौसम के कारण वे व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके।
अपने संबोधन में उन्होंने भारत के प्रथम उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने केवल 500 से अधिक रियासतों का राजनीतिक एकीकरण ही नहीं किया, बल्कि देशवासियों के बीच राष्ट्रीय एकता और विश्वास की भावना को भी मजबूत किया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व ने एक राष्ट्र, एक संविधान और साझा भविष्य की मजबूत आधारशिला रखी, जो आज भी भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत है।उपराष्ट्रपति ने कहा कि सच्ची देशभक्ति केवल नारों या भावनाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि प्रत्येक नागरिक के व्यवहार, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट कार्य संस्कृति में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने युवाओं और नागरिकों से आग्रह किया कि वे ‘वंदे मातरम्’ के प्रेरणादायी संदेश और सरदार पटेल के एकता के संकल्प को अपने जीवन में अपनाकर समावेशी, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
