नीरज, शिमला: प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल आईजीएमसी में मंगलवार को वरिष्ठ डॉक्टरों के सामूहिक अवकाश पर जाने से अस्पताल में आए मरीजों को काफी ज्यादा परेशानी उठानी पड़ी। ना तो उन्हें ओपीडी में चेकअप करने के लिए डॉक्टर मिले और ना ही ऑपरेशन हो पाए। अस्पताल ओपीडी में वरिष्ठ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हुए। वहीं रेजिडेंट डॉक्टरों की ओपीडी में मरीजों की लंबी भीड़ लगी रही।
डॉक्टर अकादमी भत्ता न मिलने से खफा होकर सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। 250 के करीब वरिष्ठ डॉक्टर मांगे पूरी ना होने से सामूहिक अवकाश पर गए, जिसके चलते अस्पताल की पूरी व्यवस्था चरमरा गई। डॉक्टरों के अचानक से सामुहिक अवकाश पर जाने से तय समय पर जो ऑपरेशन होने थे वह भी नहीं हो पाए। इसकी वजह से आईजीएमसी में रूटीन के 55 ऑपरेशन भी टक गए और सबसे ज्यादा परेशानी इस हड़ताल से उन मरीजों को हुई जिनके ऑपरेशन होने थे।
सेमडिकोट के अध्यक्ष डॉ. राजेश सूद का कहना है कि डॉक्टरों को अकादमिक भत्ता नहीं मिला है। आईजीएमसी के अलावा मंडी, हमीरपुर, टांडा और चंबा में भी वरिष्ठ डॉक्टर सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। पीएम वके दौरे के चलते मंडी में चिकित्सक अवकाश पर नहीं गए है। उन्होंने कहा कि सात माह पूर्व मुख़्यमंत्री और अधिकारियों के साथ बैठक में सीएम ने एक कमेटी बनाने के निर्देश दिए थे। दो माह में उसे रिपोर्ट भी देनी थी लेकिन अभी तक रिपोर्ट तो दूर इस कमेटी की एक ही बैठक हुई है जिस कारण मजबूरन चिकित्सकों को सामुहिक अवकाश पर जाना पड़ा।।वहीं अब रेजिडेंट डॉक्टरों की ओर से भी सामुहिक अवकाश पर जाने की धमकी दी गई हैं।
दूसरी ओर आईजीएमसी के आरडीए ( रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन ) के अध्यक्ष डॉ . मनोज मैतान ने कहा कि वह आज सरकार के पक्ष को देखेंगे अगर सरकार ने इस मांग को पूरा नहीं किया तो आरडीए भी सेमडिकोट के पक्ष में हर रोज दो से तीन घंटे की हड़ताल शुरू कर देगी।
गौर रहे कि आईजीएमसी में 3 हजार से अधिक मरीजों की ओपीडी होती है। इनमें कंसलटेंट डॉक्टरों के साथ सीनियर और जूनियर डॉक्टर काम संभालते है, लेकिन अब जूनियर डॉक्टर ही यह काम संभालेंगे। ऐसे में कम डॉक्टरों के चलते मरीजों को दिक्कतें झेलनी पड़ेगी। ओपीडी में चेकअप के बाद हर रोज करीब 100 से अधिक मरीज दाखिल किए जाते हैं। वही सेंडिकोट के अध्यक्ष डॉ. राजेश सूद ने बताया कि वह अपनी मांगो को लेकर 1 दिन की सामुहिक हड़ताल पर है।
