संजु चौधरी, शिमला: पूर्व की भाजपा सरकार की ओर से हिमाचल प्रदेश में आपातकाल में जेलों में बंद रहे लोगों के लिए शुरू की गई लोकतंत्र प्रहरी योजना को हिमाचल की सुक्खू सरकार ने बंद कर दिया हैं। इसको लेकर सरकार सोमवार को विधानसभा सदन में विधेयक लाकर कानून को निरस्त कर दिया हैं। योजना के तहत आपातकाल में जेलों में बंद रहे लोगों को पूर्व सरकार ने 20 हज़ार और 12 हज़ार मासिक पेंशन देने का निर्णय लिया गया था जिसको वर्तमान सरकार ने बंद कर दिया हैं।
योजना को बंद करने के लिए लाए गए विधेयक का सदन में विपक्ष ने विरोध किया और कहा कि आपातकाल के समय में देश की कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र का गला घोंट दिया था और जिन लोगों ने इस निर्णय के खिलाफ़ आवाज़ उठाई उनकों जेलों में डाल दिया गया। प्रेस जो की लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है उसे भी लिखने की आज़दी छीन ली थी। भाजपा सरकार ने ऐसे लोगों को पेंशन देने का निर्णय लिया था जिसे सरकार ने बंद कर दिया हैं। विपक्ष इस अलोकतांत्रिक फ़ैसले का विरोध करती है और सता में आने पर ज्यादा पैसे के साथ इस पेंशन को फिर से शुरू किया जाएगा।
वहीं संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि जयराम सरकार से पहले भी हिमाचल प्रदेश में भाजपा की सरकारें रही हैं। उसमें इस योजना को किसी भी सरकार ने शुरू नहीं किया और अब जब चुनावों से पहले जयराम ठाकुर को हार सामने दिखाई दी तो कुछ लोगों को फायदा देने के मकसद से इस योजना को शुरू किया गया जिसका हिमाचल प्रदेश पर आर्थिक बोझ पड़ा है। आज़ादी की लड़ाई में किसी भी भाजपा या आरएसएस नेता की कोई भूमिका नहीं रही है इसलिए आपातकाल में जेलों में रहे लोगों की तुलना करना सरासर ग़लत है।
