हमीरपुर, अरविंद-: कृषि और बागवानी क्षेत्र में नवाचारों तथा आधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तराखंड के उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के अधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (एचपीसीडीपी-II) का अध्ययन भ्रमण किया। इस दौरान अधिकारियों ने परियोजना के सफल क्रियान्वयन, आधुनिक कृषि तकनीकों और किसानों की आय बढ़ाने के लिए अपनाए जा रहे विभिन्न उपायों का विस्तृत अवलोकन किया।
हमीरपुर स्थित परियोजना मुख्यालय में आयोजित बैठक के दौरान परियोजना निदेशक डॉ. सुनील चौहान ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। उन्होंने अधिकारियों को एचपीसीडीपी-II की कार्यप्रणाली, उद्देश्यों, उपलब्धियों और परियोजना के तहत किए जा रहे नवाचारों की विस्तार से जानकारी दी। बैठक में जल संसाधन प्रबंधन, फसल विविधीकरण, गुणवत्तायुक्त पौध उत्पादन, आधुनिक सिंचाई प्रणाली, संरक्षित खेती और किसानों के क्षमता विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।उत्तराखंड से आए प्रतिनिधिमंडल में डॉ. रक्षिता भट्ट, डॉ. गायत्री पिपलिया और डॉ. ज्योति बजेली शामिल रहीं। वहीं बैठक में जिला परियोजना प्रबंधक डॉ. संतोष शर्मा, विषय विशेषज्ञ अनु यादव तथा वरिष्ठ विपणन अधिकारी नितिका सोनी भी मौजूद रहे।बैठक के उपरांत प्रतिनिधिमंडल ने नादौन के बड़ा स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दौरा किया। यहां अधिकारियों ने अत्याधुनिक नर्सरी प्रबंधन प्रणाली, संरक्षित खेती की तकनीकों, उच्च गुणवत्ता वाले पौध उत्पादन, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था तथा पौध संरक्षण उपायों का निरीक्षण किया। इसके साथ ही किसानों के लिए विकसित प्रशिक्षण और प्रदर्शन इकाइयों का भी अवलोकन किया गया।
भ्रमण के दौरान विशेषज्ञों ने अधिकारियों को आधुनिक बागवानी तकनीकों के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया। प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के सफल संचालन और किसानों के क्षमता विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश का यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी और प्रेरणादायक है।अधिकारियों ने बताया कि इस अध्ययन भ्रमण से प्राप्त तकनीकी जानकारी और अनुभव का उपयोग उत्तराखंड में बागवानी विकास, आधुनिक नर्सरी प्रबंधन और किसानों को उन्नत तकनीकों से जोड़ने के लिए किया जाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों राज्यों के बीच ज्ञान और अनुभव का यह आदान-प्रदान भविष्य में कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में बेहतर सहयोग और नवाचारों को नई दिशा देगा।
