कांगड़ा, संजीव महाजन-:देवभूमि हिमाचल प्रदेश के कण-कण में देवी-देवताओं के प्रति गहरी आस्था और विश्वास देखने को मिलता है। इसी लोक आस्था की अनूठी मिसाल नूरपुर के सुलयाली क्षेत्र के छोटे से गांव ठढेरु में स्थित प्राचीन मां नागिनी माता मंदिर है। करीब सौ वर्षों से यह मंदिर स्थानीय लोगों की श्रद्धा और विश्वास का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।गांव के लोगों का मानना है कि मां नागिनी माता के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है। मंदिर में होने वाले शुभ कार्यों के दौरान माता के दर्शन और आशीर्वाद को विशेष महत्व दिया जाता है। भडवार और कंडवाल की नागिनी माता को भी ठढेरु की नागिनी माता की बहन माना जाता है, जिससे इस धार्मिक स्थल से जुड़ी लोक मान्यताएं और भी समृद्ध हो जाती हैं।
प्राकृतिक वादियों के बीच स्थित इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं। मंदिर परिसर से निकलने वाली जलधारा को श्रद्धालु अमृत के समान पवित्र मानते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस जलधारा के संरक्षण और रखरखाव पर उचित ध्यान दिया जाए, तो आसपास के कई गांवों की पेयजल जरूरतों में भी मदद मिल सकती है।स्थानीय युवा साहिल ने बताया कि मंदिर से ग्रामीणों की सदियों पुरानी आस्था जुड़ी हुई है। ग्रामीणों की मांग है कि सरकार और प्रशासन इस देवस्थल की सुविधाओं व विकास पर ध्यान दें। उचित आधारभूत सुविधाएं विकसित होने पर ठढेरु का नागिनी माता मंदिर धार्मिक पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।
