आरविंदर सिंह ,हमीरपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत देशभर में आयोजित किए जा रहे शिक्षा महाकुंभ की कड़ी में इस बार छठे शिक्षा महाकुंभ का आयोजन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) हमीरपुर में किया जाएगा। तीन दिवसीय यह आयोजन 9 से 11 अक्टूबर तक चलेगा। महाकुंभ में शिक्षा क्षेत्र की मौजूदा चुनौतियों, कमियों और उनके समाधान को लेकर विशेषज्ञों के बीच व्यापक मंथन होगा।
केंद्रीय विश्वविद्यालय, एनआईटी हमीरपुर और आईआईटी मंडी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस शिक्षा महाकुंभ में हिमाचल प्रदेश और पंजाब के राज्यपाल प्रमुख रूप से शामिल होंगे। इसके अलावा विभिन्न राज्यों के सांसद, विश्वविद्यालयों के कुलपति, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, शिक्षक और स्कूल-कॉलेजों के विद्यार्थी भी कार्यक्रम का हिस्सा बनेंगे। आयोजन का उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे बदलावों, नवाचारों और नई संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना है।
शिक्षा महाकुंभ के संयोजक शमशेर सिंह और एनआईटी हमीरपुर के निदेशक एचएम सूर्यवंशी ने बताया कि तीन दिवसीय आयोजन के दौरान शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ अपने विचार साझा करेंगे। इसमें यह चर्चा होगी कि शिक्षा व्यवस्था में किन क्षेत्रों को और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकता है। साथ ही विद्यार्थियों और युवाओं को स्टार्टअप के लिए प्रोत्साहित करने, नवाचार को बढ़ावा देने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में शिक्षा की भूमिका पर भी विचार किया जाएगा।
आयोजन के दौरान विभिन्न विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे। इसके साथ ही देश के अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों, प्रयोगों और नवाचारों को भी साझा किया जाएगा। विश्वविद्यालय, कॉलेज और स्कूल स्तर के शिक्षक तथा विद्यार्थी अपने नए प्रयोग और नवाचार प्रस्तुत कर सकेंगे। इन प्रयासों पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए सुझाव जुटाए जाएंगे।
शमशेर सिंह ने कहा कि शिक्षा महाकुंभ का उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे शिक्षाविदों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर अनुभव और विचार साझा करना है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में नई तकनीक, शोध, स्टार्टअप और नवाचार को किस तरह बेहतर तरीके से जोड़ा जा सकता है, इस पर भी विशेष चर्चा होगी।
एनआईटी हमीरपुर के निदेशक एचएम सूर्यवंशी ने कहा कि बच्चे और युवा देश का भविष्य हैं। इसलिए उन्हें बेहतर और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध कराने के तरीकों पर गंभीरता से मंथन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षक और विद्यार्थी अपने नवाचार प्रस्तुत कर सकेंगे, जिससे उपयोगी विचारों और नई पहल को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
