Summer express/शिमला -:मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की दिल्ली यात्रा और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत अन्य केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात को लेकर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार की कमजोर वित्तीय नीतियों के कारण हिमाचल गंभीर आर्थिक दबाव में पहुंच गया है और अब सरकार केंद्र से अतिरिक्त आर्थिक सहायता तथा कर्ज की सीमा बढ़ाने की मांग कर रही है।
भारद्वाज ने कहा कि राज्य सरकार को पहले से मालूम था कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद वित्त वर्ष 2026-27 से राजस्व घाटा अनुदान समाप्त हो जाएगा। इसके बावजूद सरकार ने प्रदेश की आय बढ़ाने, खर्चों को नियंत्रित करने और वित्तीय अनुशासन लागू करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए। मुख्यमंत्री द्वारा केंद्र के समक्ष करीब ₹8,000 करोड़ के संभावित वार्षिक वित्तीय अंतर का मुद्दा उठाना इसी स्थिति का प्रमाण है।उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार वर्ष 2032 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य बता रही है, वहीं दूसरी ओर अतिरिक्त वित्तीय सहायता और अधिक कर्ज की गुहार लगा रही है। भारद्वाज के अनुसार आत्मनिर्भरता का आधार बढ़ता कर्ज नहीं, बल्कि राजस्व के नए स्रोत विकसित करना, अनावश्यक खर्चों में कटौती और बेहतर वित्तीय प्रबंधन होना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर CAG के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024-25 में हिमाचल का राजस्व घाटा ₹6,804.61 करोड़ और वित्तीय घाटा ₹12,611.05 करोड़ रहा। वहीं राज्य की बकाया देनदारियां GSDP के 44.11 प्रतिशत तक पहुंच गईं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े सरकार की आर्थिक नीतियों और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।भारद्वाज ने कहा कि कांग्रेस सरकार को प्रदेश की आर्थिक स्थिति के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र की ओर से हिमाचल को सड़क, स्वास्थ्य, जल शक्ति, ऊर्जा, विकास परियोजनाओं और आपदा राहत समेत विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग मिलता रहा है।उन्होंने मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा के दौरान उठाए गए विभिन्न मुद्दों का भी उल्लेख किया। इनमें मुफ्त बिजली के बदले नवीकरणीय ऊर्जा प्रमाणपत्र, शानन और बैरा स्यूल परियोजनाओं से जुड़े मामले, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड में हिमाचल के अधिकार तथा दो स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति जैसे विषय शामिल हैं। भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश हित से जुड़े उचित मुद्दों पर भाजपा केंद्र से सकारात्मक सहयोग की पक्षधर है, लेकिन राज्य सरकार अपनी आर्थिक विफलताओं की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश का खर्च उसकी आय की तुलना में लगातार बढ़ रहा है, तो सरकार के पास वित्तीय सुधार को लेकर क्या ठोस योजना है। केवल टैक्स, शुल्क और फीस बढ़ाना और फिर अतिरिक्त कर्ज की मांग करना दीर्घकालिक आर्थिक नीति नहीं हो सकती।भारद्वाज ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने जनता से कई बड़ी गारंटियां दी थीं, लेकिन सत्ता में आने के बाद प्रदेश पर वित्तीय दबाव बढ़ता गया। अब सरकार को अपने खर्च और आर्थिक नीतियों का हिसाब जनता के सामने रखना चाहिए।
