Summer express/राहुल चावला, धर्मशाला–: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले को पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने और धर्मशाला को बड़े आयोजनों के केंद्र के रूप में विकसित करने की प्रतिबद्धता दोहराई है। शुक्रवार को धर्मशाला पहुंचे मुख्यमंत्री ने पर्यटन विकास, होटल कारोबार, नए जिलों के गठन, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और केंद्रीय विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का लक्ष्य कांगड़ा को पर्यटन की दृष्टि से मजबूत बनाना और स्थानीय कारोबारियों के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर तैयार करना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांगड़ा को प्रदेश की पर्यटन राजधानी के रूप में विकसित करने की दिशा में सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसके तहत धर्मशाला में क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़े और होटल कारोबार को गति मिले। सरकार का विशेष ध्यान पर्यटन सीजन के दौरान होटलों में ऑक्यूपेंसी बढ़ाने पर है, जिससे पर्यटन उद्योग से जुड़े कारोबारियों, युवाओं और स्थानीय लोगों को लाभ मिल सके।
धर्मशाला में राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों पर जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि धर्मशाला में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की ई-गवर्नेंस कार्यशाला में विभिन्न राज्यों के लगभग 100 आईएएस अधिकारी भाग ले रहे हैं।इस तरह के आयोजनों से धर्मशाला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है और पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने में मदद मिलती है। सरकार की योजना दिसंबर में धर्मशाला में नॉर्थ जोन का अधिवेशन आयोजित करने की भी है।उन्होंने कहा कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केवल प्राकृतिक सुंदरता पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यहां बड़े सम्मेलन, सरकारी कार्यक्रम और अन्य महत्वपूर्ण आयोजन भी होने चाहिए। इससे पर्यटन सीजन के अतिरिक्त समय में भी होटल कारोबार को फायदा मिल सकता है।मुख्यमंत्री ने सकोह में प्रस्तावित आइस स्केटिंग रिंक का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना को 24 घंटे संचालित करने की योजना है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि अब सरकार किसी भी परियोजना का शिलान्यास तभी करेगी, जब उसके लिए बजट उपलब्ध होगा और काम शुरू करने की प्रक्रिया निर्धारित स्तर तक पहुंच चुकी होगी। सरकार का उद्देश्य घोषणाओं के बजाय योजनाओं को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना है।
नए जिलों के गठन पर आयोग की सिफारिश होगी निर्णायक
हिमाचल प्रदेश में नए जिलों के गठन की संभावनाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि कैबिनेट इस संबंध में प्रस्ताव स्वीकार कर चुकी है। हालांकि, नए जिले बनाने का अंतिम निर्णय संबंधित आयोग की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा।मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रस्तावित समीक्षा केवल जिलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि ब्लॉक, एसडीएम कार्यालयों और तहसीलों के पुनर्गठन पर भी विचार किया जाएगा। इसके लिए विशेषज्ञों की समिति गठित की गई है, जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता, भूमि रिकॉर्ड विभाग की निदेशक और सेवानिवृत्त अधिकारी शामिल हैं।उन्होंने कहा कि प्रशासनिक ढांचे में बदलाव का मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं को आम जनता के नजदीक पहुंचाना है, ताकि लोगों को अपने काम करवाने के लिए दूर-दराज के कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। जनगणना से संबंधित नियमों और आवश्यक अनुमतियों को ध्यान में रखते हुए ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुक्खू ने कहा, “जयराम जी अब सपने देख रहे हैं, मैं क्या कर सकता हूं।” उन्होंने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें नए जिलों के मुद्दे को चुनावी राजनीति से जोड़ने की बात कही गई थी।
स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा में सुधार का दावा
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था में सुधार को सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया। उन्होंने दावा किया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में टांडा मेडिकल कॉलेज की स्थिति में लगभग 60 प्रतिशत सुधार हुआ है। उनके अनुसार, यहां करीब 20 वर्षों बाद सीनियर रेजिडेंसी की शुरुआत की गई है, जिससे चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर यानी पीजी सीटों की संख्या बढ़ाई गई है और अब कुल 320 पीजी सीटें स्वीकृत हैं। सरकार का प्रयास है कि राज्य में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़े और मरीजों को बेहतर उपचार के लिए दूसरे राज्यों का रुख कम करना पड़े।शिक्षा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने प्रदेश की रैंकिंग में सुधार का दावा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में हिमाचल प्रदेश शिक्षा के आकलन में 21वें स्थान पर था, जबकि वर्ष 2025 के आकलन में गुणात्मक शिक्षा के मामले में प्रदेश पांचवें स्थान पर पहुंच गया। सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए काम कर रही है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय को ₹20 करोड़ देने की पेशकश
धर्मशाला स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ₹20 करोड़ देने के लिए तैयार है। हालांकि, इसके लिए बिजली और पानी के खर्च की जिम्मेदारी को लेकर केंद्र सरकार तथा विश्वविद्यालय प्रशासन की सहमति जरूरी है।उन्होंने बताया कि वन संबंधी खर्च राज्य सरकार वहन कर रही है। इसके अलावा देहरा परिसर तक बिजली और पानी की व्यवस्था के लिए भी राज्य सरकार की ओर से राशि उपलब्ध करवाई गई है। मुख्यमंत्री के अनुसार, विश्वविद्यालय की ओर से बिजली और पानी के खर्च को लेकर सहमति पत्र मिलने के बाद ₹20 करोड़ जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।उन्होंने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण संस्थान से जुड़े मामलों को राजनीतिक विवाद बनाने के बजाय आपसी सहमति से सुलझाया जाना चाहिए, ताकि संस्थान का कामकाज सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।
सड़कों में सुधार और पर्यटन कारोबार को गति देने की तैयारी
धर्मशाला की सड़कों की खराब हालत को लेकर पूछे गए सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शहर को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए काम कर रही है और सड़कों की स्थिति सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बेहतर आधारभूत सुविधाएं आवश्यक हैं।मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार के चार वर्ष 11 दिसंबर को पूरे होंगे। इस अवसर पर एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान सामने आए इन बयानों से स्पष्ट है कि सरकार कांगड़ा को पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने, प्रशासनिक व्यवस्था की समीक्षा करने और शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने पर जोर दे रही है। हालांकि, इन योजनाओं की वास्तविक सफलता इनके प्रभावी क्रियान्वयन, उपलब्ध बजट और निर्धारित समयसीमा में काम पूरा होने पर निर्भर करेगी।

