राकेश ,ऊना। प्रसिद्ध पीरनिगाह मंदिर के संचालन को लेकर बसोली पंचायत और ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा मंदिर का संचालन अपने हाथ में लिए जाने और पंचायत चुनाव संपन्न होने के बाद भी व्यवस्था पंचायत को वापस न सौंपे जाने से ग्रामीणों में नाराजगी है। शनिवार को बसोली पंचायत के ग्रामीणों ने एमसी पार्क में धरना-प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने ‘साड़ा हक एथे रख’ के नारे लगाए और स्पष्ट किया कि जब तक पीरनिगाह मंदिर का संचालन पंचायत को वापस नहीं सौंपा जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन ने उनकी आवाज को दबाने के लिए डीसी कार्यालय परिसर में धारा-163 लागू की है। उनका कहना है कि प्रशासन उन्हें कार्यालय परिसर में प्रदर्शन करने से रोक सकता है, लेकिन अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने से नहीं रोक सकता।
इससे पहले शुक्रवार को बसोली पंचायत के बड़ी संख्या में ग्रामीण मिनी सचिवालय परिसर में धरने पर बैठ गए थे। ग्रामीणों ने डीसी कार्यालय का घेराव कर मंदिर के संचालन से जुड़ा विवाद जल्द सुलझाने की मांग की थी। काफी देर तक धरना चलने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला तो ग्रामीणों ने वहीं लंगर लगाया और धरने में मौजूद लोगों को भोजन भी करवाया।
मामला बढ़ने के बाद जिला प्रशासन ने डीसी कार्यालय परिसर में 22 से 25 अगस्त तक धारा-163 लागू करने के आदेश जारी किए हैं। आदेश के तहत परिसर में एक समय में तीन से अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक लगाई गई है। हालांकि सरकारी कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मियों और पूर्व अनुमति से आयोजित बैठकों में शामिल लोगों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है।
धारा-163 लागू होने के बाद ग्रामीणों ने अपना धरना एमसी पार्क में शुरू कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से पीरनिगाह मंदिर की व्यवस्था और संचालन बसोली पंचायत के माध्यम से होता रहा है। पंचायत चुनाव में किसी भी राजनीतिक दल का प्रधान चुना गया हो, मंदिर की देखरेख पंचायत ही करती रही है।
ग्रामीणों के मुताबिक पंचायत चुनाव में देरी के दौरान जिला प्रशासन ने मंदिर का संचालन अपने हाथ में लिया था। उस समय ग्रामीणों को आश्वासन दिया गया था कि पंचायत चुनाव संपन्न होने और नई पंचायत के गठन के बाद मंदिर की व्यवस्था वापस पंचायत को सौंप दी जाएगी। अब चुनाव संपन्न हो चुके हैं और नवनिर्वाचित प्रधानों को उनकी शक्तियां भी मिल गई हैं, लेकिन मंदिर की चाबियां अभी तक पंचायत को वापस नहीं मिली हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि वे करीब दो महीने से लगातार प्रशासनिक अधिकारियों से मंदिर का संचालन वापस सौंपने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से सरकार के आदेश का इंतजार करने की बात कही जा रही है, जिससे विवाद का समाधान नहीं हो पा रहा।
बसोली पंचायत के प्रधान सतनाम सिंह और ग्रामीणों ने सरकार व जिला प्रशासन से जल्द मंदिर का संचालन पंचायत को सौंपने की मांग की है। ग्रामीणों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकार की लड़ाई जारी रखेंगे।

