भावना शर्मा, शिमला: प्रदेश में भाजपा सरकार के कैबिनेट मंत्रियों में शामिल एक नाम डॉ रामलाल मार्कंडेय का भी शामिल है। तकनीकी शिक्षा एवं जनजातीय विकास मंत्री डॉ. राम लाल मार्कंडेय को जनजातीय क्षेत्र के विकास के नेता के रूप में भी जाना जाता है ओर जनजातीय क्षेत्र के विकास को इन्होंने अपनी प्राथमिकता पर भी सदैव रखा है। इनके राजनीतिक सफर की बात की जाए तो डॉ.मार्कंडेय का राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से ही शुरू हुआ। इन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन एनएसयूआई से अपनी छात्र राजनीति की शुरुवात की। वर्ष 1989 से लेकर 1993 तक वह एनएसयूआई में वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओर एनएसयूआई अध्यक्ष रहे।
डॉ. रामलाल मार्कंडेय का जन्म 17 अक्टूबर 1966 को उदयपुर लाहौल स्पिति में हुआ। उनके पिता भागदास मार्कंडेय का संबंध राजनीति से सीधे तौर पर तो नहीं था लेकिन वो वह 25 साल तक तिंदी पंचायत के प्रधान रहे। डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने अपनी शिक्षा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से पूरी की। उन्होंने एमए,एमफिल,पीएचडी के साथ ही डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी इन पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की डिग्री हासिल की है। इसी दौरान उनका रुझान राजनीति की तरफ भी हुआ। डॉ. मार्कंडेय ने लभले ही उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत एनएसयूआई छात्र संगठन से हुई हो लेकिन उन्होंने अपना राजनीतिक सफर कांग्रेस से शुरू न करते हुए हिमाचल विकास कांग्रेस से शुरू किया।
डॉ.रामलाल मार्कंडेय की बात एनएसयूआई में नहीं बन पाई जिस वजह से उन्होंने 1998 में जब पंडित सुखराम ने कांग्रेस से अलग होकर हिमाचल विकास कांग्रेस बनाई तो राम लाल मार्कंडेय ने इस नई पार्टी से चुनाव लड़ा ओर जीत हासिल की। यही से उनके असल राजनीतिक जीवन की शुरुवात हुई और इस समय उन्हें भाजपा-हिविकां गठबंधन सरकार का लाभ भी मिला और मंत्री की कुर्सी भी उन्हें मिली। उसके बाद जब हिमाचल विकास कांग्रेस में बिखराव शुरु हुआ ताे उन्हाेंने भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने भाजपा के टिकट पर तीन बार लाहौल स्पीति विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा है जिसमें से दो बार उन्होंने जीत हासिल की है जबकि एक बार उन्हें हार का सामना भी करना पड़ा है।
वहीं अगर वर्तमान समय की बात की जाए तो लाहौल स्पीति विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के पास डॉ. रामलाल मार्कंडेय के अलावा अन्य कोई विकल्प उभरता नजर नहीं आ रहा है। ऐसे में जाहिर है कि इस बार भी भाजपा वर्ष 2000 22 के विधानसभा चुनावों में लाहौल स्पीति विधानसभा क्षेत्र से डॉ रामलाल मारकंडे को ही उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतारेगी।
2007 में भाजपा के टिकट से डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने लड़ा चुनाव
डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने जब भाजपा का दामन थामा तो उन्होंने पार्टी के लिए लगातार काम क़िया। इसके बाद उन्हें वर्ष 2007 में भाजपा के टिकट से लाहौल स्पिति से चुनाव लड़ने का मौका मिला ओर उन्होंने जीत हासिल कर यह सीट भाजपा की झोली में डाली। इसके बाद वर्ष 2017 में भी इन्होंने इस विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर जीत हासिल की ओर कैबिनेट में इन्हें मंत्री पद दिया गया।
2012 में भी लड़ा चुनाव लेकिन चुके
वर्ष 2012 में भी भाजपा ने लाहौल स्पीति विधानसभा सीट से डॉ.रामलाल मार्कंडेय पर ही अपना दांव खेला था लेकिन इस बार वह इस सीट पर जीत भाजपा को नहीं दिला पाए उस समय कांग्रेस के उम्मीदवार रवि ठाकुर ने इस सीट पर अपना कब्जा जमाया और डॉ रामलाल मार्कंडेय को हार का सामना करना पड़ा।
मंत्री पद में सरकार ने किया था बदलाव
जयराम कैबिनेट के मंत्री डॉ. राम लाल मार्कंडेय उन नेताओं में से एक है जिनका जयराम राज में डिमोशन हुआ है। दरअसल 2017 में सरकार गठन के बाद डॉ. मार्कंडेय के पास तकनीकी शिक्षा और जनजातीय विकास के साथ-साथ कृषि जैसा महत्वपूर्ण महकमा भी था, पर 2020 में हुए मंत्रिमंडल फेरबदल में उनका पोर्टफोलियो हल्का कर दिया गया।
हर पांच साल बाद बदलती है विधानसभा सीट पर पार्टी की सत्ता
लाहाैल-स्पीति की ठंडी फिजाओं अगर सत्ता की सियासत की गर्माहट की बात की जाए तो यहां हर 5 साल बाद इस सीट पर यहां के मतदाता सत्ता परिवर्तन करते हैं। वर्ष 1993 में यहां कांग्रेस ने जीत हासिल की तो 1998 में यहां हिमाचल विकास कांग्रेस की जीत हुई। इसके बाद वर्ष 2003 में फिर कांग्रेस यहां सत्ता में आई। इसके बाद वर्ष 2007 में यहां भाजपा ने जीत हासिल की। वर्ष 2012 में यहां कांग्रेस ने जीत हासिल की जबकि वर्ष 2017 में यहां बीजेपी के टिकट पर डॉ. रामलाल मार्कंडेय ने जीत हासिल की थी। अब इस बार के विधानसभा चुनावों में देखना होगा कि यह सीट किसकी झोली में जाती है।
