विकास शर्मा, चिंतपूर्णी:गरीब आदमी की दुर्दशा व बेबसी के लिए कांग्रेस व भाजपा के नेता जिम्मेवार रहे हैं। इन नेताओं ने अपने राजनीतिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए जनता के हितों को हमेशा नजरअंदाज किया। यह बात शनिवार को मूंही, मनियाला, कूहना, कोलापुर और बणी पंचायतों में जनसंवाद कार्यक्रमों के दौरान उपस्थित लोगों से कही। पराशर ने कहा कि कोरोनाकाल में उपजे हालातों के बाद आम जनमानस की हालत पर किसी को तरस नहीं आया। मंहगाई, बेरोजगारी, शिक्षण संस्थानों में स्टाफ की कमी, पेयजल समस्या और बेहाल स्वास्थ्य संस्थानों के मुद्दे पर सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाई जानी चाहिए थी, लेकिन विपक्षी दल के नेता इस दौरान कहीं नजर नहीं आए। परिणामस्वरूप सत्ता के नशे में मदहोश नेता बदले और तबादले के सियासत करते रहे।
उन्होंने कहा कि वह जसवां-प्रागुपर के गरीब वर्ग के उत्थान के लिए ही राजनीति मैदान में हैं। संजय ने कहा कि जसवां-प्रागपुर क्षेत्र की कई समस्याओं का हल दशकों बाद भी नहीं हो पाया है। कई प्राइमरी स्कूलों में वर्षों से एक ही शिक्षक पर पढ़ाई का जिम्मा है। मिडल, मैट्रिक और सीनियर सेकंडरी स्कूलों में भी स्टाफ की कमी है। विज्ञान प्रयोगशालाओं को लेकर कोई काम नहीं हुआ। कॉलेजों में स्टाफ की कमी के साथ साइंस विषय अब तक शुरू नहीं हो पाए हैं। क्षेत्र का सबसे बड़ा श्राप बेरोजगारी की समस्या बन चुकी है। इस समस्या को दूर करने के प्रयासों में बहुत ज्यादा कमी रही है। पेयजल की समस्या गर्मी के मौसम में तो रहती ही है, लेकिन कई गांवों में वर्ष पर पानी की कमी से ग्रामीण जूझते हुए देखे जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी गरीब व्यक्ति कच्चे व जर्जर मकानों में रहने को मजबूर हैं। आवास योजना के तहत गरीब व्यक्तियों को कोई फायदा नहीं पहुंचा। इस विधानसभा क्षेत्र के दूरदराज के गांवों में दशकों पुराने हालात ही हैं। संपर्क मार्ग न होने या फिर रास्तों की जर्जर हालत से ग्रामीण काले पानी जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं। इन गांवों में अगर कोई व्यक्ति बीमार हो जाए तो फिर उसका भगवान ही रखवाला होता है। पराशर ने कहा कि अगर उन्हें क्षेत्र का प्रतनिधित्व करने का अवसर मिलता है तो हर समस्या के हल के लिए व्यवस्था परिवर्तन के तहत कार्य होगा।
