भावना शर्मा: देश की सबसे पुरानी नगर निगम में शामिल शिमला नगर निगम के चुनाव 2 मई को होने जा रहे हैं सभी राजनीतिक दल अपने-अपने प्रत्याशी की जीत के लिए पूरा दमखम चुनावी मैदान में लगा रहे हैं। वहीं अगर इस नगर निगम के इतिहास की बात की जाए तो शिमला नगर निगम पर 25 सालों तक कांग्रेस ने राज किया और कांग्रेस यहां काबिज रही, लेकिन पिछले 10 सालों से कांग्रेस नगर निगम की सत्ता से बाहर हैं यही वजह है कि इस बार पूरा दमखम कांग्रेस की ओर से नगर निगम चुनावों में लगाया जा रहा है ताकि दोबारा से कांग्रेस से निगम की सत्ता को हासिल कर सकें।
25 सालों की कांग्रेस की सत्ता को शिमला नगर निगम से हटाने का दम सीपीआईएम ने रखा था। 2012 में शिमला नगर निगम में सीपीआईएम ने कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखाया। उस समय महापौर और उपमहापौर के चुनाव सीधे तौर पर हुए थे। जहां पर सीपीआईएम के ही महापौर और उपमहापौर बने थे ऐसे में यह पहली बार हुआ था कि सीपीआईएम नगर निगम की कुर्सी पर काबिज हुई थी। इसके बाद वर्ष 2017 में नगर निगम के चुनाव हुए। उस समय भले ही प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी लेकिन नगर निगम में भाजपा ने जीत का परचम लहराया था। कांग्रेस से सत्ता में रहते हुए भी नगर निगम की कुर्सी पर वापस नहीं पहुंच पाई थी और अब जब एक बार फिर से वर्ष 2023 में नगर निगम के चुनाव होने जा रहे हैं तो प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए कांग्रेस को नगर निगम की सत्ता वापिस दिलवाने की एक बड़ी चुनौती सामने हैं।
नगर निगम शिमला दावों को लेकर चल रहा चुनावी प्रचार 30 अप्रैल को थम जाएगा जिसके बाद 2 अप्रैल को मतदान की प्रक्रिया पूरी होगी जबकि 4 अप्रैल को नगर निगम शिमला के चुनाव का परिणाम घोषित होगा और तब स्थिति स्पष्ट हो जाएगी की 10 सालों बाद कांग्रेस की नगर निगम की सत्ता में वापसी होगी या फिर कोई अन्य राजनीतिक दल इस मैदान को फतह कर जाएगा।
इस बार पार्टी चिन्ह पर हो रहे चुनाव
इस बार प नगर निगम शिमला के चुनाव पार्टी चिन्ह पर रहे हैं हो रहे हैं। एक बार फिर से कांग्रेस, भाजपा सीपीआईएम के अलावा इस बार आम आदमी पार्टी ने भी अपने उम्मीदवार चुनावी मैदान में उतारे हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच है कांटे की टक्कर इन चुनावों में चल रही है यही वजह है कि इन चुनावों में कांग्रेस और भाजपा जीत को लेकर पूरा दमखम चुनावी मैदान में दिखा रहे हैं। दोनों ही राजनीतिक दलों के बड़े नेता अपने प्रत्याशियों के चुनावी प्रचार में उतरे हुए हैं और जगह-जगह जनसभाएं कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मोर्चा संभाला हुआ हैं। वह खुद सभी वार्डों में जाकर जनसभाएं कर कांग्रेस उम्मीदवारों के लिए वोट मांग रहे हैं।
शिमला नगर निगम चुनाव मुख्यमंत्री की साख का सवाल
नगर निगम चुनाव मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए भी विधानसभा चुनावों के बाद पहली परीक्षा हैं। यह चुनाव मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के लिए साख का सवाल बन गए हैं और पिछले 10 सालों से नगर निगम की सत्ता से बाहर कांग्रेस को सत्ता में लाने की बड़ी जिम्मेवारी मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर हैं। शिमला नगर निगम क्षेत्र में 34 वार्ड आते हैं जिसमें 18 शिमला शहरी विधानसभा जबकि 12 कसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र ओर चार वार्ड शिमला ग्रामीण विधानसभा के तहत आते हैं। शिमला शहरी में इस बार कांग्रेस के विधायक हैं जबकि कसुम्पटी से कांग्रेस के विधायक अनिरुद्ध सिंह ओर ग्रामीण विधानसभा से विक्रमादित्य सिंह सूक्खु सरकार में मंत्री हैं। ऐसे में कांग्रेस नगर निगम चुनावों में वापसी को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नजर आ रही हैं।
केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने संभाली हैं निगम चुनावों में भाजपा की कमान
एक और जहां मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू नगर निगम शिमला में कांग्रेस की वापसी करवाने को लेकर चुनावी प्रचार में जुटे हैं तो वही जीत को लेकर भाजपा भी पूरा जोर लगा रही हैं। बड़े चेहरे के रूप में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने नगर निगम चुनावों की कमान संभाली हैं। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के अलावा हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर सहित अन्य बड़े नेता चुनावी प्रचार में जुटे हैं।
पहली बार 14 मई 1986 में हुआ था नगर निगम शिमला का पहला चुनाव
नगर निगम शिमला में पहली मर्तबा चुनाव 14 मई 1986 में करवाए गए थे। उस समय नगर निगम शिमला के तहत 21 वोट थे जिसके लिए हक चुनाव करवाए गए थे। इसके बाद 2 जून 1986 को नवनिर्वाचित नगर निगम का गठन हुआ था।
