मोहित प्रेम शर्मा ( TNS ) : इस भयानक सपने से गुजरने से बेहतर होता कि मेरी मौत हो जाती । ये दर्द से भरे शब्द उस दुखी लड़की के मुख से निकले जिसका एक कमरा उस इमारत में था जो आईजीमसी अस्पताल के पास हुए भूस्खलन की चपेट में आकर ढह गई थी। घटना 23 अगस्त की सुबह की हैं। प्रोमिला एक सरकारी आवास के एक कमरे में अपनी बीमार मां के साथ रहती थी । बुधवार की वो सुबह प्रोमिला और उसकी 75 वर्षीय कैंसर पीड़ित मां के जीवन में एक अंधेरा लेकर आई। उस दिन हालात तब तक सामान्य थे जब तक एक तेज़ आवाज़ के साथ ही सब कुछ तहस नहस नहीं हो गया।
भूस्खलन से आईजीएमसी के पास प्रारी हाउस आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। यह एक सरकारी कर्मचारी आवास था जिसमें प्रोमिला अपनी बीमार मां के साथ इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास रहती थी। प्रोमिला का कहना है – मैं अपनी 75 वर्षीय मां के साथ रहती हूं , जो डिम्बग्रंथि के कैंसर से पीड़ित हैं और 2016 से उनका आईजीएमसी अस्पताल के कैंसर अस्पताल में इलाज चल रहा हैं। प्रोमिला ने आगे बताया कि मैंने पिछले हफ्ते शहर के बाजार में राम नगर की एक दुकान में सेल्स गर्ल के रूप में अपनी नौकरी भी खो दी क्योंकि मंदी के दौर में कोई ग्राहक नहीं था।
प्रोमिला कहती हैं, ”मैं गुरुवार रात आईजीएमसीए अस्पताल में सोई क्योंकि वहां जाने के लिए कोई जगह नहीं थी। वह कहती है, “मैं नौकरी की तलाश में हूं और यहां तक कि मैं घरों में जाकर साफ-सफाई और झाड़ू-पोछा करने को भी को तैयार हूं क्योंकि मुझे अपनी मां के इलाज के लिए पैसे की सख्त जरूरत हैं। पीड़िता ने बताया कि वो सिर्फ मैट्रिक तक पढ़ाई कर पाई है , लिहाजा नई नौकरी पाने में उसे कड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी ।
एक अन्य भूस्खलन पीड़ित सुमन भी है ,जिसका कमरा भी प्रोमिला के कमरे के बगल में था, कहती है, “हम अपना सामान नहीं बचा सके और केवल वही कपड़े बचे हैं जो हमने ढह चुके घर से बाहर निकलते समय पहने थे। घरेलू सहायिका के रूप में काम करने वाली सुमन का कहना है कि भूस्खलन में उसने अपना सब कुछ खो दिया है और उसके पास अपने बेटे की स्कूल फीस देने तक के लिए भी पैसे नहीं हैं।
उन्होंने कहा कि उनके पास कोई आश्रय नहीं है, कोई कपड़े नहीं हैं और यहां तक कि कक्षा 5 में पढ़ने वाले उनके बेटे की किताबें भी भूस्खलन में गायब हो गईं।
सुमन का कहना हैं, “हमारी दुर्दशा दयनीय है लेकिन इसने अधिकारियों का ध्यान आकर्षित नहीं किया क्योंकि इस भूस्खलन में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी। अगर राज्य सरकार आपदा पीड़ितों की मदद नहीं कर सकती तो इतने सारे दान लेने का क्या फायदा।
वह आगे कहती हैं, “हमने गुरुद्वारे में खाना खा रहे हैं , कभी अपने रिश्तेदारों के घरों में जा जाकर अपना पेट भर रहे हैं । हमें कोई भी सरकारी मदद या तत्काल राहत नहीं मिली हैं।
शिमला में पिछले हफ्तों में एक साथ इतने भूस्खलन हो चुके हैं जिनका कोई हिसाब नहीं हैं। बीते 10 दिनों में जिले में बारिश से संबंधित घटनाओं में मरने वालों की संख्या बढ़कर 26 हो गई है, जिसमें समर हिल भूस्खलन में 17, फागली में पांच और कृष्णा नगर में दो मौतें शामिल हैं। वहीं अगस्त माह में राज्य में बारिश से संबंधित घटनाओं में अब तक 120 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 24 जून को हिमाचल प्रदेश में मानसून की शुरुआत के बाद से कुल 238 लोगों की मौत हो गई है जबकि 40 लोग अभी भी लापता हैं।
राज्य में चार बार भारी बारिश हो चुकी हैं। बड़ी तबाही हो चुकी हैं। सबसे पहले 9 और 10 जुलाई को मंडी और कुल्लू जिलों में बड़े पैमाने पर तबाही हुई थी ।राजधानी शिमला और सोलन जिले 14 और 15 अगस्त को दूसरे दौर में प्रभावित हुए और मंगलवार रात को तीसरे दौर में शिमला शहर को भारी नुकसान हुआ। नुकसान तो हो गया लेकिन पीछे छोड़ गया हैं वो कभी न भरने वाले ज़ख्म जिनके दर्द से जिनका सब कुछ इस आपदा में छिन गया और अब वे इस दर्द साथ ही जीने को मजबूर हैं।
