संजीव महाजन,नूरपुर: प्रदेश में हो रही भारी बारिश के चलते लगातार है जान-माल का नुकसान प्रदेश में हो रहा हैं। भारी आपदा इस समय प्रदेश पर आई है जिसके बीच लोगों को अपने घरों के साथ ही अपनी अपनी जान भी गंवानी पड़ रही हैं। एक और जहां बारिश ने तबाही मचा रखी है तो वहीं फोरलेन निर्माण भी इस आपदा के बीच नुकसान की बड़ी वजह बनकर सामने आ रही हैं। इसी तरह के हालात विधानसभा ज्वाली क्षेत्र की पंचायत ब्लाह कोटला की पंचायत भेडखड में बने हुए हैं।
यहां रहने वाले लोगों के हालात भयानक है और तस्वीरें भी डराने वाली हैं। भेडखड में चार घर पठानकोट मंडी फोरलेन के कार्य के चलते ओर लगातार हो रही भारी बरसात के चलते गिरने के कगार पर हैं। घरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गई हैं। लोग घरों को खाली करके यहां वहां दिन गुजारने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि हम लोग इसकी शिकायत फरवरी मार्च से लगातार डीसी कांगड़ा , प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई ,एसडीएम ज्वाली से कर रहे हैं लेकिन किसी ने हमारी बात नहीं सुनी। हमारे घरों के नीचे सीधी सीधी कटिंग करके हमारे घरों के लिए खतरा पैदा कर दिया जिसका नतीजा हम आज भुगत रहे हैं।
लोगों का कहना है कि एन एच वालों ने जिस पहाड़ी पर उनके घर हैं उसके ठीक नीचे सीधी कटिंग की है ओर सेफ्टी दिवार भी नहीं लगाई जिस कारण वहां पर लगातार भूस्खलन हो रहा हैं। उन्होंने कहा कि आज वह इस कगार पर पहुंच गए हैं कि वह कभी भी जमींदोज हो सकते हैं। लोगों ने सारा दोष एनएचएआई और जिला कांगड़ा प्रशासन के ऊपर लगाते हुए कहा कि हमारी जनता की एक भी ना सुनकर जीवन भर की पूंजी हमारे आशियाने पूरी तरह से तबाह कर दिए गए हैं।
अंतराष्ट्रीय मानवाधिकार के सह निदेशक राजेश पठानिया ने बताया कि प्रोजेक्ट डायरेक्टर और एनएच के इंजीनियर से जब इस बारे बात की तो उन्होंने कहा कि हमें आधे पैसे दें तो ही हम वहां पर सुरक्षा दीवार लगा सकते हैं जो कि सरासर अन्याय हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से एवं स्थानीय विधायक एवं कृषि मंत्री चंद्र कुमार से निवेदन किया कि वह कृप्या यहां पर आकर अपने लोगों की सुध लें।
उन्होंने कहा कि जनता लाचार है वह केवल निवेदन कर सकती है जबकि एनएचएआई बेलगाम हैं। किसी की नहीं सुनती और जिला कांगड़ा का प्रशासन उनके आगे लाचार हैं। उन्होंने कहा कि जल्द सुरक्षा दिवार लगावा कर घरों का बाकी का नुकसान होने से बचाया जा सकता हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासन उनको घरों और जमीन के बर्बाद होने का मुआवजा उन्हें देने की मांग भी उठाई हैं।
