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मोदी मैजिक के चलते लगातार दो बार प्रदेश की सभी चारों लोकसभा सीटें गई भाजपा की झोली में

Chandrika
Chandrika 5 Min Read
Updated 2024/05/26 at 5:16 PM
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शिमला(TSN)-पिछले लगातार दो चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मैजिक’ के बीच भाजपा ने हिमाचल में जीत के तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए थे। वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में मोदी मैजिक इस कद्र हावी रहा कि हिमाचल के वोटर्स ने हाथ का साथ नहीं दिया। हिमाचल की जनता ने छप्पर फाड़ समर्थन देते हुए लगातार दो बार प्रदेश की सभी चारों लोकसभा सीटें पीएम मोदी की झोली में डाल दी थी। रिकॉर्ड जीत के साथ 2019 के चुनाव में भाजपा ने लगातार दूसरी बार क्लीन स्वीप किया।

पिछले चुनावों में प्रदेश की लोकसभा सीट पर इन्होने की जीत हासिल

पिछली बार के चुनाव पर गौर करें तो कांगड़ा संसदीय सीट से भाजपा के किशन कपूर, शिमला से सुरेश कश्यप, मंडी से फिर रामस्वरूप शर्मा और हमीरपुर से लगातार चौथी बार अनुराग ठाकुर ने जीत दर्ज की थी। आम चुनाव में मोदी मैजिक का आलम यह रहा कि करीब 4 लाख 77 हजार 623 मतों के अंतर से कांगड़ा से भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर ने अब तक की सबसे बड़ी रिकॉर्ड जीत दर्ज की थी। किशन कपूर को 7 लाख 25 हजार 218 जबकि कांग्रेस प्रत्याशी रहे पवन काजल को 2 लाख 47 हजार 595 वोट मिले। मंडी से रामस्वरूप शर्मा को 6 लाख 47 हजार 189 मत और उनके प्रतिद्वंद्वी आश्रय शर्मा को 2 लाख 41 हजार 730 मत मिले थे। इसी तरह से हमीरपुर संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी अनुराग ठाकुर 6 लाख 82 हजार 692 और उनके प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस के रामलाल ठाकुर को 2 लाख 83 हजार 120 वोट ही पड़े।शिमला संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी सुरेश कश्यप को 6 लाख 06 हजार 183 मत मिले, जबकि कांग्रेस के धनीराम शांडिल को 2 लाख 78 हजार 668 मत मिले थे। हिमाचल के इतिहास में अब तक की चारों संसदीय सीटों पर सबसे बड़ी जीत थी। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों में भी मोदी लहर में भाजपा ने कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर चारों सीटें जीती थीं। उस वक्त कांगड़ा से भाजपा प्रत्याशी शांता कुमार की 1 लाख 70 हजार 072 की सर्वाधिक लीड थी। उस लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 45 प्रत्याशी मैदान में थे। भाजपा प्रत्याशियों से बुरी तरह हारे कांग्रेस उम्मीदवारों को छोड़कर बाकी अन्य दलों के प्रत्याशी और निर्दलीय अपनी जमानत भी नहीं बचा पाए।लोकसभा चुनाव में पहली बार सूबे के सभी 68 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने बढ़त हासिल की। मोदी मैजिक के आगे कांग्रेस के दिग्गज नेता भी अपने गढ़ नहीं बचा पाए.

1984 में बना था एक लाख से ज्यादा जीत का अंतर

1967 में चौथी लोकसभा से लेकर 2019 के चुनाव में सिर्फ एक बार पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी की ह*त्या के बाद हुए 1984 के आम चुनाव में कांग्रेस के चारों लोकसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों ने एक लाख से ज्यादा का मार्जिन हासिल किया था। हालांकि उस चुनाव में भी कोई प्रत्याशी दो लाख का आंकड़ा नहीं छू सका था। वर्ष 1984 के लोकसभा चुनाव में सबसे भारी अंतर से जीत हासिल करने वाले शिमला से कांग्रेस प्रत्याशी केडी सुल्तानपुरी का मार्जिन 1 लाख 96 हजार 291 था। मंडी से सुखराम का मार्जिन 1 लाख 31 हजार 651, कांगड़ा से चंद्रेश कुमारी का 1 लाख 17 हजार 433 और हमीरपुर से प्रत्याशी नारायण चंद 1 लाख 24 हजार 933 के मार्जिन से जीते थे।

2004 में 3-1 से जीत थी कांग्रेस

वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों में प्रदेश की चार सीटों में से तीन पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी। शिमला संसदीय सीट से कांग्रेस के धनीराम शांडिल, मंडी सीट से प्रतिभा सिंह और कांगड़ा संसदीय सीट से चंद्र कुमार को जीत मिली थी। जबकि हमीरपुर सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने भाजपा की लाज बचाई थी। इसी तरह से 2009 के चुनाव में भाजपा 3-1 से जीती थी। कांगड़ा से राजन सुशांत, हमीरपुर से अनुराग ठाकुर और शिमला संसदीय सीट पर वीरेंद्र कश्यप ने कांग्रेस को पराजित किया था। जबकि मंडी संसदीय सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जीत हासिल की थी।

TAGGED: Shimla loksabha election
Chandrika May 26, 2024
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