राहुल चावला,धर्मशाला(TSN)-कांगड़ा जिला में एक महीने से अधिक समय से बारिश न होने के कारण खेतों की नमी सूखने शुरू हो गई है.वहीं बात किसानों की की जाए तो किसान गेहूं की बिजाई के लिए बारिश का इंतजार कर रहे है.सूखे खेतों में गेहूं की बिजाई करना किसानों के लिए बहुत मुश्किल है,जिला कांगड़ा में 92 हजार हेक्टेयर भूमि में गेहूं की बिजाई होती है।
क्या कहती है धर्मशाला की जनता –
नगर निगम धर्मशाला के वार्ड 9 की पार्षद सुषमा रंधावा का कहना है बारिश नहीं होने से किसानों पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ रहा है,मेरे वार्ड में साढ़े चार हजार से ज्यादा की आबादी है, अधिकतर एरिया खेतीबाड़ी का है,इस समय की बात करे तो गेहूं की बिजाई का काम चल रहा है लेकिन पानी नहीं होने के चलते किसान खेती बाड़ी नहीं कर पर रहे है,उन्होंने कहा की पानी के कुछ सोर्स टूटे पड़े है,और जब में पार्षद बनी थी उस समय एक 10 साल से बंद पड़ी कुहल को चलवाया था।
धर्मशाला के समीप जटेहड़ सकोह निवासी राम नारायण सिंह का कहना है कि सूखे खेतों में किसानों द्वारा बिजाई करने में खासी दिक्कतें पेश आ रही है,क्योंकि फसल, सिंचाई के अभाव में उग नहीं रही है। खडडों में पानी का जलस्तर बर्फबारी कम होने घटा है।
सब्जी विक्रेता हेमराज का कहना है कि काफी समय से बारिश न होने के कारण किसान परेशान है,क्योंकि वर्तमान समय गेहूं की बिजाई का है।जमीन सूखी पड़ी है,जिससे बिजाई नहीं हो पा रही है।किसानों को अब क्षेत्र के बारिश के देवता इंदू्रनाग से ही उम्मीद है।
क्या कहते है कृषि विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर डा. पवन शर्मा
कृषि विभाग हिमाचल प्रदेश उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला के ज्वाइंट डायरेक्टर डा. पवन शर्मा का कहना है की सवा महीने से बारिश नहीं हुई है लेकिन ऐसा भी नहीं कहा जा सकता की जमीन में नमी की कमी है,उन्होंने कहा की मैंने खुद भी खेतों में जाकर देखा है की अभी काफी नमी मिटटी में है और गेहूं की बिजाई का काम भी चल रहा है,उन्होंने कहा की सिंचित क्षेत्रों में कोई समस्या नहीं है और पानी भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है,उन्होंने कहा की जहा बारिश नहीं है वहां भी सूखे की कोई भी प्रॉब्लम नहीं है,उन्होंने कहा की कांगड़ा जिला में लगभग 92 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बिजाई की जाती है,इस बर्ष की बात करे तो 1 लाख 76 हजार मीट्रिक टन के करीब गेहूं के उत्पाद की संभावना है।
ज्वाइंट डायरेक्टर कृषि विभाग डा. पवन शर्मा का कहना है कि कृषि के पुराने तरीकों पर नजर दौड़ाएं तो वर्तमान दौर में कृषि कार्य में काफी बदलाव आया है।बहुत सी चीजें कृषि क्षेत्र में अच्छी भी हुई हैं,जबकि कुछ चीजों में कमी भी आई है। कृषि के लिए पशुपालन जरूरी है,जो कि एक-दूसरे के पूरक माने जाते हैं।पूर्व में बरसात का मौसम खत्म होते ही किसानों द्वारा बैलों के जरिए खेतों की जुताई कर दी जाती थी,जिससे कि जमीन में नमी का नुकसान न हो। यही नहीं बिजाई से पहले भी 3 से 4 बार खेतों में हल चलाया जाता था, जिससे वातावरण की नमी को खेतों में संरक्षित करने की कोशिश की जाती थी। एक तरह से सॉयल कंजरवेशन की तकनीक को प्रयोग किया जाता था।अब बिजाई के समय ही लोग ट्रैक्टर खेतों में लाकर ट्रैक्टर से खेतों को जोतकर उसी दिन बिजाई कर देते हैं।लंबे समय से बारिश न होने के बावजूद किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। किसान जैसे पहले खेतों में बिजाई करते रहेे हैं, उस तरह करते रहें, खेतों को खाली न छोड़ें।
