हमीरपुर ,21 नवंबर(TSN)-पूर्व विधायक एवं भाजपा नेता राजेंद्र राणा ने एचपीटीडीसी मामले में बड़ा बयान दिया है.उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि सुक्खू सरकार ने जानबूझ कर अधिकारियों पर कोर्ट मे गलत जानकारी देने का दबाव बनाया.उन्होंने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के स्वामित्व वाले 56 होटलों में से 18 को बंद करने के हाई कोर्ट के आदेश को लेकर सरकार की मंशा पर कड़े सवाल उठाए।राजेंद्र राणा ने कहा कि अदालत का निर्णय सरकार द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर दिया गया है और वह अदालत के इस निर्णय का सम्मान करते हैं।हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार ने जानबूझकर सही और पूरी जानकारी अदालत के समक्ष पेश नहीं की, ताकि इन बेशकीमती संपत्तियों को अपने चहेतों को सस्ते दामों में बेचने का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।
राजेंद्र राणा ने कहा कि प्रदेश सरकार लगातार आर्थिक संकट का बहाना बनाकर सरकारी संपत्तियों को बेचने की कोशिश कर रही है।उदाहरण के तौर पर,उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक विरासत वाइल्ड फ्लावर हॉल को ओबेरॉय ग्रुप से लंबी लड़ाई के बाद वापस लिया गया था।अब,सरकार इसे फिर से दिल्ली में बैठे अपने आकाओं के इशारे पर उसी समूह के हवाले करने की योजना बना रही है।
राजेंद्र राणा बोले वास्तविक तथ्यों के साथ लड़ेंगे कानूनी लड़ाई
राजेंद्र राणा ने स्पष्ट किया कि हिमाचल प्रदेश जैसे खूबसूरत और ऐतिहासिक महत्व वाले राज्य को बिकने नहीं दिया जाएगा।उन्होंने कहा कि इस बारे पूरे दमखम और वास्तविक तथ्यों के साथ कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और सरकार की साजिश का पर्दाफाश करने के लिए सभी तथ्य माननीय अदालत के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे।उन्होंने कहा कि पैलेस होटल (चैल) और द कैसल (नग्गर)जैसे प्रतिष्ठित होटलों को केवल घाटे का दिखावा करके बंद किया जा रहा है। ये फैसले हिमाचल की ऐतिहासिक और पर्यटन संपत्तियों को कमजोर करने का प्रयास हैं।
राजेंद्र राणा ने जनता से अपील की है कि वे राज्य की विरासत और संपत्तियों को बचाने के इस संघर्ष में साथ दें। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ इन होटलों को बचाने की नहीं,बल्कि हिमाचल की अस्मिता और उसके भविष्य को सुरक्षित रखने की है।
