नालागढ़/जगत सिंह: नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से भाजपा से टिकट की रेस में चार नेताओं ने अपनी अपनी दावेदारी ठोकी है। जिनमें से एक हाल ही में कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल हुए विधायक लखविंदर सिंह राणा है। वही नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक कृष्ण लाल ठाकुर और नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक व पूर्व मंत्री स्व.हरिनारायण सिंह सैनी के भतीजे हरप्रीत सिंह सैनी व सरवन चंदेल है। अब चार नेताओं की दावेदारी के बाद पार्टी हाईकमान की मुश्किलें बढ़ चुकी है । देखना होगा कि भाजपा हाईकमान किस नेता पर नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से दाव खेलती है।
टिकट को लेकर भाजपा हाईकमान की बड़ी मुश्किलें
लखविंदर सिंह राणा की बात की जाए तो वे नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से चार बार चुनाव कांग्रेस पार्टी से लड़ चुके हैं और दो बार उन्होंने चुनाव जीता है और मौजूदा समय में वह विधायक भी हैं।लखविंदर सिंह राणा कुछ ही समय पहले कांग्रेस को छोड़ भाजपा में शामिल हुए हैं और केंद्रीय भाजपा हाईकमान की देखरेख में उन्होंने भाजपा को ज्वाइन किया है। चर्चा इस बात को भी लेकर है कि अगर लखविंदर सिंह राणा पार्टी हाईकमान से टिकट देने की शर्त पर भाजपा में शामिल हुए हैं। तो टिकट नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से लखविंदर सिंह राणा को मिल सकता है। सवाल यह उठता है कि अगर लखविंदर सिंह राणा को टिकट मिलता है तो क्या पूर्व विधायक कृष्ण लाल ठाकुर पूर्व मंत्री हरिनारायण सिंह सैनी के भतीजे हरप्रीत सैनी व सरवन चंदेल को पार्टी हाईकमान चारों नेताओं को एक मंच पर इकट्ठा ला सकती हैं या नहीं यह देखना होगा।
पूर्व विधायक कृष्ण लाल ठाकुर नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से दो बार चुनाव लड़ चुकें है और एक बार वह विधायक रह चुके हैं। कृष्ण लाल ठाकुर की बात की जाए तो पिछले साढे 4 साल से वह भाजपा के लिए पूरी विधानसभा क्षेत्र में काम कर रहे हैं और लगातार लोगों के संपर्क में हैं। विधायक राणा के भाजपा में शामिल होने के बाद कृष्ण लाल ठाकुर ने परिवार मिलन सम्मेलन अपने घर अंदरोला में रखा था , उस कार्यक्रम के माध्यम से कृष्ण लाल ठाकुर का विधायक लखविंदर सिंह राणा के खिलाफ खासा रोष देखा गया था।
दूसरी ओर पूर्व मंत्री स्वर्गीय हरिनारायण सिंह सैनी के भतीजे हरप्रीत सैनी की हरप्रीत सिंह सैनी के राजनीतिक कैरियर की बात की जाए तो उन्होंने 2017 में आजाद उम्मीदवार के तौर पर नालागढ़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और वह चौथे स्थान पर रहे थे विधानसभा चुनाव के बाद हरप्रीत सिंह सैनी ने भाजपा को ज्वाइन कर लिया और तब से लेकर वह भी लगातार लोगों के संपर्क में हैं और पार्टी हाईकमान से वह भी टिकट की दावेदारी जता चुके है। और हाल ही में उन्होंने स्वर्गीय हरिनारायण सिंह सैनी यादगार में सम्मेलन रखा था और सम्मेलन के माध्यम से अपना शक्ति प्रदर्शन भी किया था और वह हजारों की भीड़ जुटाने में भी कामयाब रहे थे।
अब बात करते हैं सरवन चंदेल की वह पार्टी हाईकमान से टिकट की दावेदारी जता चुके हैं और लगातार लोगों से संपर्क बनाए हुए हैं। यहां पार्टी हाईकमान के लिए मुश्किल इस बात की बनी हुई है अगर इन चारों में से किसी एक को पार्टी टिकट देती है तो 3 नेताओं को मनाकर कैसे पार्टी एक मंच पर बिठा पाती है और कैसे सभी नेताओं को साथ लेकर पार्टी यह चुनाव लड़ सकती है। यहां सोशल मीडिया पर देखने में आया है कि एक नेता के समर्थक दूसरे नेता के खिलाफ बयान बाजी करते रहते हैं। और पार्टी के बीच गुटबाजी सरेआम देखी जा सकती है। हालांकि बीते दिनों राज्यसभा सांसद सिकंदर कुमार नालागढ़ दौरे पर आए थे तो उनसे जब सवाल पूछा गया था कि पार्टी की गुटबाजी को वह कैसे दूर कर पाएंगे तो उन्होंने कहा था कि सभी को एक मंच पर बिठा लिया जाएगा और पार्टी एकजुटता के साथ आगामी विधानसभा चुनाव लड़ेगी।
राजनीतिक विशेषज्ञों का ये हैं कहना
राजनीतिक विशेषज्ञों से का कहना है कि इन चारों में से अगर एक नेता को टिकट मिलता है तो उनमें से एक या दो नेता भी बागी होकर चुनाव लड़ते हैं या किसी अन्य दल में जाकर चुनाव लड़ते हैं, तो पार्टी को इसका नुकसान आगामी विधानसभा चुनावों में झेलना पड़ सकता है। अगर पार्टी सभी नेताओं के मन मिटाव दूर करके सबको एक साथ लेकर चलती है तो आगामी विधानसभा चुनावों में भी भाजपा का प्रत्याशी विजयी हो सकता है। लेकिन मौजूदा समय की तरह अगर नेताओं की आपसी गुटबाजी खत्म ना हुई तो भाजपा की आपसी गुटबाजी का फायदा अन्य राजनीतिक दलों को मिल सकता है।
