विकास शर्मा, मनाली: हिमाचल प्रदेश को देवभूमि के नाम से विश्व भर में जाना जाता है। देवभूमि यानी देवी और देवताओं की धरती। यह नाम हिमाचल को यूंही नहीं दिया गया है,बल्कि यहां देवी देवताओं से जुड़ी जो मान्यताएं और परंपराएं हैं वह इस नाम को सार्थक करती हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण देखने को मिलता है अंतराष्ट्रीय कुल्लू दशहरे में जहां सैकड़ों की संख्या में देवी देवता एक जगह पर आ कर भक्तों को दर्शन देते हैं।
यह देव परंपरा और मान्यता पयर्टन नगरी मनाली की आराध्य देवी मां हडिंबा और कुल्लू दशहरे को लेकर भी जुड़ी हुई है। माता हिडिंबा की दशहरे में अहम भूमिका रहती है। माता हिडिंबा को राजघराने की दादी भी कहा जाता है ओर कुल्लू दशहरा देवी हिडिंबा के आगमन से शुरू होता है।
बता दें कि कुल्लू घाटी में दशहरे के पर्व का सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व है। हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में दशहरा एक दिन कानहीं ब्लकि सात दिन का त्यौहार है और इसकी विशेषता यह है कि जब पूरे भारत वर्ष में दशहरा खत्म हेाता है तब कुल्लू दशहरे का शुभारंभ होता है । दशहरे में घाटी के सभी सेकंडों देवी देवता भाग लेते है और सभी देवी देवताओं की इस महाकुंभ में अहम भूमिका रहती है। इन्ही में से एक है पर्यटन नगरी मनाली की आराध्य देवी माता हिडिंबा ।
कुल्लू दशहरा देवी हिडिंबा आगमन से शुरू होता है। पहले दिन देवी हिडिंबा रथ कुल्लू के राजमहल में प्रवेश करता है। यहां माता की पूजा अर्चना के बाद रघुनाथ भगवान को भी ढालपुर में लाया जाता है। जहां से सात दिवसीय दशहरा उत्सव शुरू हो जाता है और माता अगले सात दिनों तक अपने अस्थायी शिविर में ही रहती है और लंका दहन के पश्चात ही अपने देवालय वापिस लौटती है। कल से शुरू होने वाले देव महाकुंभ के लिए आज देवी हिडिंबा अपने कारकूनों वह हरियानों के साथ दशहरे में भाग लेने के लिए अपने स्थान मनाली से निकल पड़ी है।
हिडिंबा माता के विशेष व्यक्ति देवी चंद ने बताया की माता आज रात कुल्लू पंहुचेगी और कल प्रात: देवी हिडिंबा जब कुल्लू पंहुचेगी तो वंहा पर देवी मां का स्वागत किया जाएगा। फिर वंहा पर भगवान रघुनाथ जी की छड़ी माता को लेने के लिए रामशिला नामक स्थान पर लाई जायेगी जंहा से फिर माता भगवान रघुनाथ के मंदिर में प्रस्थान करेंगी।
माता के वंहा पर पंहुचने पर पूरे रिति रिवाज से माता की पूजा अर्चना की जाएगी इसके पश्चात ही भगवान रद्युनाथ अपने मंदिर से बाहर आएंगे और फिर भगवान रघुनाथ और सभी देवी देवता रथ मैदान के लिए रवाना होंगे, जंहा से भगवान रघुनाथ की शोभायात्रा आरंभ होनी है। उसके बाद कुल्लू दशहरे या फिर हम कहें देव महाकुंभ का आगाज होगा ।
