अरविंदर सिंह, हमीरपुर: जंगलों में आगजनी की घटनाओं से निपटने के लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस सिलसिले में हमीर होटल में गुरुवार को कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अधिकारियों और कर्मचारियों को जंगलों को आग से बचाने के लिए टिप्स दिए गए हैं। जंगलों में आग के दौरान किस तरह से अन्य विभागों और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर कार्य करना है इस विषय पर कार्यशाला में विस्तार से चर्चा की गई है।
कार्यशाला के दौरान विभाग के मुख्य अरण्य पाल अनिल शर्मा व डीएफओ हमीरपुर राकेश कुमार विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस कार्यशाला के दौरान आग लगने के संभावित कारणों और पिछले कुछ वर्षों में आग लगने से जंगलों की संपदा को हुए नुकसान के आंकड़ों को भी प्रस्तुत किया गया। फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की ओर से जंगलों में आग लगने पर मोबाइल पर मैसेज के जरिए सीधे अपडेट वन विभाग के कर्मचारियों को दिया जाता हैं। इस अलर्ट मैसेज पर किस तरह से प्रतिक्रिया की जानी है उनकी से लेकर भी कार्यशाला में अधिकारियों ने अपनी राय रखी हैं।
इस अवसर मुख्य अरण्यपाल अनिल शर्मा ने बताया कि वनों को आग से बचाने के लिए विभिन्न तकनीकों की जानकारी देने के लिए आज हमीरपुर में वन विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने बताया कि वन कर्मियों को किस प्रकार से आग से बचाना है और इसमें किस प्रकार से जनसहयोग व जागरूकता फैलानी है, के बारे में जानकारी दी गई।
वहीं मंडल वन अधिकारी हमीरपुर राकेश कुमार ने बताया कि वनों को आने वाले समय में आग से बचाने के लिए वनकर्मियों को आज प्रशिक्षित किया गया। उन्होंने बताया कि वनों को आग से बचाने के लिए वन विभाग की ओर से तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। उन्होंने बताया कि हमीरपुर वन डिविजन में 6 स्थानों पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही 20 अग्निशमन टीमें भी तैयार की गई हैं। उन्होंने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी भी वन कर्मियों को दे दी गई हैं ।उन्होंने बताया कि हमारी 70 बीटें हैं जिनमें हमने 43 को अति संवेदनशील क्षेत्रों में रखा ओर 18 को संवेदनशील तथा 9 को सामान्य क्षेत्र में रखा गया हैं।
