अनिल कुमार,किन्नौर: प्रदेश का जनजातीय जिला किन्नौर बर्फ़ की चादर से ढक चुका हैं। जिला के क़ई गांव इस समय बर्फ़ की सफ़ेद चादर ओढ़े हुए हैं। इन्हीं में से एक हैं हांगो गांव। बर्फ़बारी के बाद यह समुचा गांव बर्फ की सफ़ेद चादर में ढका हुआ है ओर चांदी सा चमक रहा हैं। इस बर्फ़बारी के बाद अब यहां आम लोगों की दुश्वारियां तो बढ़ी है लेकिन बागवानों के लिए यह बर्फ़बारी उनके सेब के बगीचों के लिए अमृत के समान हैं, जिससे बर्फबारी होने से बागवान यहां खुश नजर आ रहे हैं। बर्फ़बारी के बाद खेतों में सिंचाई इत्यादि से निजात मिलती हैं। बर्फ जहां जिला में ठंड के साथ आपदा लेकर आती हैं वहीं यह बर्फ़ बागवानों व किसानों के लिए अमृतपान से कम नहीं हैं।
किन्नौर जिला के हांगो गांव से आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है जहां पर बर्फ़बारी के बाद सन्नाटा छाया हुआ हैं। बर्फ़बारी के बाद पीने के पानी के जलस्त्रोत भी जम चुके हैं। सड़के बर्फ के चलते फिसलन भरी हो चुकी हैं और अब इस गांव में लोग केवल घर अंदर दुबके हुए हैं। बर्फ़बारी के बाद यह गांव अब शीतलहर की चपेट में आ चूका हैं। यहां पर अब मार्च महीने तक बर्फ पूरी तरह जमी रहेगी।
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बर्फ़बारी के बाद हांगो गांव की पहाड़ियों पर प्रशासन ने ट्रैकिंग पर प्रतिबंध लगाया हैं। वहीं बर्फबारी के बाद हांगो गांव में इन दिनों पहाड़ों से जंगली जानवर भी ग्रामीण इलाकों में उतर रहे हैं। फिलहाल बर्फबारी के बाद इस गांव में जनजीवन अस्त व्यस्त है, लेकिन बर्फबारी के बाद भी यहां के लोग व जिला के अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में अब लोग घरों में बैठकर सर्दियों में मनाए जाने वाले स्थानीय कार्यक्रमों को घर के अंदर रहकर मनाते हैं।
