Shimla, 5 December-:हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में शिक्षा विभाग द्वारा शास्त्री के 193 पदों को बैचवाइज आधार पर भरने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान विभाग ने अदालत के समक्ष हलफनामा दायर करते हुए बताया कि पदों को भरने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इस पर न्यायमूर्ति संदीप शर्मा ने विभाग को निर्देश दिया कि चयन प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब न करते हुए इसे शीघ्र पूरा किया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत से मुख्य रूप से आग्रह किया था कि वर्ष 2013 से 2015 की बैच वाइज सूची को आधार बनाकर शास्त्री पदों को भरा जाए तथा ऐसे आवेदकों पर भी विचार हो, जिन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता बाद में सुधार करवाई है। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने बताया कि वर्ष 2016 में ट्रिब्यूनल के एक निर्णय के आधार पर यह स्पष्ट किया गया था कि योग्यता सुधारने वाले उम्मीदवारों की डिग्री को सुधार के वर्ष के बजाय उनके प्रारंभिक उत्तीर्ण वर्ष के आधार पर मान्य किया जाएगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि विनोद कुमार शर्मा मामले में पारित निर्णय अंतिम रूप पा चुका है। ऐसे में विभाग द्वारा योग्यता सुधार करवाने वाले अभ्यर्थियों को प्रक्रिया में सम्मिलित करना नियमों के अनुरूप है और इसमें किसी प्रकार की अवैधता नहीं पाई गई।
क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी केस: आरोपी की जमानत अर्जी खारिज
उधर, क्रिप्टोकरेंसी धोखाधड़ी से जुड़े एक अन्य प्रकरण में हाईकोर्ट ने आरोपी विजय कुमार जुनेजा की जमानत याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति सुशील कुकरेजा की अदालत ने टिप्पणी की कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध से जुड़ा है, जिसका प्रभाव व्यापक रूप से देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों के वित्तीय हितों पर पड़ता है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि आर्थिक अपराधों को समाज के लिए गंभीर खतरा माना जाता है, इसलिए केवल लंबे समय से जेल में रहने को जमानत का आधार नहीं बनाया जा सकता।
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि मामले का मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा पहले ही विदेश भाग चुका है, जिससे यह आशंका बढ़ जाती है कि जमानत मिलने पर याचिकाकर्ता भी न्याय प्रक्रिया से बच सकता है। सार्वजनिक धन के बड़े नुकसान और परिस्थिति की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने जमानत आवेदन को अस्वीकार कर दिया।
