विकास शर्मा, चिंतपूर्णी: हिमाचल प्रदेश के ऊना जिला के चिंतपूर्णी में करवाए जा रहे विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग उठी हैं। यह मांग चिंतपूर्णी की होटल एसोसिएशन की ओर से उठाई गई हैं। इस मुद्दे को लेकर सोमवार को बैठक का आयोजन एक निजी होटल में किया गया। बैठक में बिजनेस एसोसिएशन चिंतपूर्णी के सदस्य प्रधान कुंदन गर्ग भी शामिल हुए।
इस बैठक में चिंतपूर्णी में करवाए जाने वाले विकास कार्यों में स्थानीय लोगों की सहभागिता ना होने के मुद्दे पर विशेष चर्चा की गई जिसमें सभी सदस्यों ने एकमत से कहा की चिंतपूर्णी में करवाए जाने वाले विकास कार्यों में स्थानीय लोगों से भी चर्चा की जाए ताकि क्षेत्र का संतुलित विकास हो सके और स्थानीय लोगों को भी कोई परेशानी का सामना ना करना पड़े। इस मौके पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए होटल एसोसिएशन के प्रधान संजीव शर्मा ने कहा चिंतपूर्णी में 68 से अधिक रजिस्टर्ड होटल हैं। इसके अलावा आसपास के क्षेत्र में 10 पंचायतों के प्रतिनिधि हैं और भी यहां बुद्धिजीवी हैं परंतु चिंतपूर्णी में स्थानीय लोगों को विश्वास में ना लेकर बहुत सारे परिवर्तन किए जा रहे हैं जिसमें बूम बैरियर और इलेक्ट्रिक गाड़ियां चलाना आदि शामिल हैं।
उनका कहना हैं कि मंदिर न्यास ने पहले भी बिना स्थानीय लोगों की राय के बिना भरवाई में स्कूल के पास कूड़ा संयंत्र लगाया था जो कि राशि बेकार गई। इसके अलावा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का काम पिछले कई वर्षों से चल रहा है जो आज तक पूरा ही नहीं हुआ। इसके अलावा उन्होंन मंदिर न्यास को बाकी कार्य को छोड़कर सर्वप्रथम मंदिर परिसर में 10000 श्रद्धालुओं के लिए खड़े होने की व्यवस्था के लिए बनने वाले हाल के कार्य को करवाने की बात कही जिसके लिए 45 करोड़ की राशि केंद्र सरकार ओर प्रसाद योजना के तहत स्वीकृत हैं। उन्होंने कहा कि पिछले सात-आठ वर्षों से इस राशि को मंदिर न्यास खर्च नहीं कर पाया हैं। इसके अलावा उन्होंने मंदिर न्यास चिंतपूर्णी क्षेत्र को प्रयोगशाला ना बनाएं जाने कि भी बात कही। उन्होंने कहा की अगर ऐसा होता हैं तो स्थानीय लोगों को इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा।
