राहुल चावला, धर्मशाला: जिला मुख्यालय धर्मशाला के डीआरडीए सभागार में शनिवार को मिशन धनवंतरी के तहत आयुर्वेदिक प्रॉडक्ट को प्रमोट करने के लिए सेल्फ हेल्प ग्रुप की जिला स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए अतिरिक्त जिलाधीश कांगड़ा सौरभ जस्सल ने कहा कि मिशन धनवंतरी के तहत जिला कांगड़ा में सेल्फ हेल्प ग्रुप की महिलाओं की ओर से आयुर्वेदिक प्रोडक्ट तैयार किए जा रहे हैं, जिसमें साबुन, अगरबत्ती व अन्य प्रोडक्ट शामिल हैं।
एडीसी कांगड़ा ने कहा कि विभिन्न ग्रुप्स की ओर से तैयार किए जा रहे प्रोडक्ट्स को जिला कांगड़ा में विभिन्न स्थानों पर बेचा जा रहा है, क्योंकि कांगड़ा में काफी देश-विदेश के पर्यटक आते हैं। अपना कांगड़ा के कुछ स्टोर्स हैं, जिन्हें जल्द चलाया जाएगा और इन स्टोर्स में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स की ओर से बनाए गए प्रोडक्ट्स को रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले लोकल लेवल पर मार्केट कैप्चर करने के बाद स्टेट, नेशनल और इंटरनेशनल पर आगे जाएंगे।
उन्होंने कहा कि तुलसी के साबुन, हल्दी के साबुन और आर्गेनिक चाय को हम बढ़ावा दे रहे हैं, जिनकी काफी डिमांड हैं। वर्कशॉप में आयुर्वेद से डॉ. सुनील, आरसेटी के अधिकारी, एनजीओ व स्टेकहोल्डर्स ने अपने सुझाव दिए हैं। एडीसी ने कहा कि तुलसी के साबुन, हल्दी के साबुन और आर्गेनिक चाय को हम बढ़ावा दे रहे हैं, जिनकी काफी डिमांड हैं।
उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास रहेगा कि इनकी पैकेजिंग को भी ऑर्गेनिक करें, जिससे लगे कि पप्रोडक्ट्स पूरी तरह से नेचुरल हैं। कई प्रगतिशील कृषक महिलाएं हमारे साथ जुड़ी हैं, जो आयुर्वेदिक प्रोडक्ट्स बनाने हेतू जरूरी चीजों की खेती में आगे आ रही हैं। देखादेखी से भी काफी लोग अलग खेती की ओर बढ़ते हैं। गगल के आसपास के एरिया में पहले किसान गेहूं, धान और मक्की की उगाते थे, लेकिन कुछ प्रगतिशील किसानों ने नकदी फसलें जैसे कि सब्जियां उगानी शुरू की, वर्तमान में काफी किसान सब्जी की खेती इस क्षेत्र में कर रहे हैं।
कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे समाजसेवी एवं प्रमुख व्यवसाई कैप्टन संजय पराशर ने कहा कि पतंजलि उत्पाद, लिज्जत पापड़ उत्पाद विदेशों में जा सकते हैं तो हिमालय के आंचल में बसे कांगड़ा के उत्पाद बाहर क्यों नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि इसकी शुरूआत साबुन से होगी और उसके बाद अन्य उत्पादों की भी ब्रांडिंग की जाएगी। उन्होंने कहा कि बैठक में कैपेसिटी बढ़ाने पर चर्चा हुई हैं। यह प्रोजेक्ट समाज में क्रांति लाएगा और गांवों में महिलाओं की सशक्तिकरण का कारण बनेगा।
पराशर ने कहा कि बैठक में हमने यह तय किया है कि अच्छे सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के उत्पादों को बड़े शहरों में बेचा जाएगा। 500 टन का जो टारगेट रखा है, उसमें पहली सीढ़ी 500 क्विंटल की रखी हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि धनवंतरी मिशन में कम से 5000 महिलाएं स्वरोजगार से जुड़ें। कई लोग हिमाचल और हिमालय के नाम पर कई प्रोडक्ट पूरी दुनिया में बेच रहे हैं और हिमाचल में इसमें पिछड़ रहे हैं। हमें लगता है कि जो अच्छे प्रोडक्ट हैं, उन्हें सारी दुनिया तक पहुंचाना चाहिए। आज की बैठक में जो चर्चा हुई है जो रणनीति बनी है, उसके सार्थक परिणाम एक साल के भीतर नजर आएंगे।
