राहुल चावला, धर्मशाला-:हिमाचल प्रदेश की समृद्ध कला और सांस्कृतिक विरासत को नए अंदाज में प्रस्तुत करने का प्रयास धर्मशाला के कांगड़ा आर्ट म्यूजियम में देखने को मिला।यहां पंचरुखी के निकट लदोह गांव के कलाकार विनय अवस्थी की ओर से आयोजित चार दिवसीय प्रदर्शनी में बांस से तैयार मंदिरों के मॉडल और बोतल आर्ट ने पर्यटकों को खूब आकर्षित किया।पारंपरिक मंदिरों की हूबहू झलक पेश करती इन कलाकृतियों को देखकर दर्शक हैरान रह गए। प्रदर्शनी को मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बीच कलाकार को तीन प्रमुख मंदिरों की प्रतिकृतियां बनाने का ऑर्डर भी मिला है।
प्रदर्शनी देखने पहुंचीं पटियाला की पर्यटक रिभा राठौर ने कलाकृतियों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने कई संग्रहालयों और प्रदर्शनियों का भ्रमण किया है, लेकिन बांस से मंदिरों की इतनी आकर्षक प्रतिकृतियां पहली बार देखीं। उन्होंने कहा कि कलाकार ने अपनी रचनात्मकता से अनुपयोगी वस्तुओं को खूबसूरत कलाकृतियों में बदलकर एक मिसाल पेश की है। इस तरह की कला को प्रोत्साहन मिलना चाहिए, ताकि कलाकारों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें।
कलाकार विनय अवस्थी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2019 में ‘वेस्ट को बेस्ट’ बनाने की सोच के साथ अपने काम की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में उन्होंने बांस, पुराने टायरों और अन्य बेकार वस्तुओं से टेबल, कुर्सियां और सजावटी सामान तैयार किया। इसके बाद वर्ष 2022 में उन्होंने कांगड़ा के प्रसिद्ध मंदिरों की प्रतिकृतियां बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया। धर्मशाला में आयोजित प्रदर्शनी में उन्हें उम्मीद से बेहतर प्रतिक्रिया मिली। एक दिन में ही 300 से अधिक लोग उनकी कलाकृतियां देखने पहुंचे। इनमें इंदौर के एक स्कूल के लगभग 80 विद्यार्थी और शिक्षक भी शामिल रहे, जिन्होंने विशेष रूप से बोतल आर्ट में दिलचस्पी दिखाई।विनय अवस्थी के अनुसार, प्रदर्शनी के दौरान उनकी तीन से चार कलाकृतियों की बिक्री भी हुई। वहीं, कांगड़ा आर्ट म्यूजियम की क्यूरेटर ऋतु मलकोटिया ने संग्रहालय के ग्राउंड फ्लोर पर इन कलाकृतियों के प्रदर्शन के लिए अलग कॉर्नर बनाने की इच्छा जताई है। इसके तहत कलाकार को बज्रेश्वरी मंदिर, बैजनाथ शिव मंदिर और चामुंडा देवी मंदिर की प्रतिकृतियां तैयार करने का ऑर्डर मिला है। विनय जल्द ही इन मॉडलों को बनाने का काम शुरू करेंगे।
कलाकार ने बताया कि वर्ष 2023 में हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें दिल्ली हाट में प्रदर्शनी लगाने का अवसर मिला था। 17 दिनों तक चली इस प्रदर्शनी में करीब ढाई से तीन लाख लोगों ने उनकी कला को देखा। उस समय उनका उद्देश्य बिक्री के बजाय अपना निजी संग्रह तैयार करना और भविष्य में अपनी गैलरी स्थापित करना था। अब भी वह अपनी मूल कलाकृतियों को संग्रह में सुरक्षित रखते हुए उनकी प्रतिकृतियां बनाकर लोगों तक पहुंचाना चाहते हैं।

