मनमिन्दर अरोड़ा, कुल्लू – सेब दिवस के अवसर पर बजौरा स्थित बागवानी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र में किसान मेले का आयोजन किया गया। हिमाचल प्रदेश बागबानी विकास परियोजना के तहत मंगलवार को आयोजित मेले में बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के उपकुलपति प्रो राजेश्वर चंदेल ने बतौर मुख्याथिति बागवानों का मार्गदर्शन किया। किसान मेले में कुल्लू , मंडी व लाहौल स्पीति जिलों से आए सैंकड़ों बागवान शामिल हुए। किसान मेले में विभिन्न बागवानों ने अपने उत्पादों का भी प्रदर्शन किया , जिन्हें उपकुलपति द्वारा सम्मानित भी किया गया। प्रदर्शनी में जेरोमाईन सेब के बेहतर उत्पादन के लिये श्रवण लाल को प्रथम , किंगरॉट के लिए अनीश भंडारी को द्वितीय व गाला के लिए नरेंद्र नेगी को तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर किसानों एवं बागवानों को सम्बोधित करते हुए अधिंकाश वैज्ञानिकों ने सेब उत्पादन के दौरान आ रही चुनौतियों को लेकर बागवानों से अपने विचार सांझा किये। बागवानों को सम्बोधित करते हुए नौणी विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो राजेश्वर चंदेल ने खेती व बागवानी को बचाने के लिए जँहा मिश्रित खेती अपनाने की सलाह दी, वंही उन्होंने कहा कि मिश्रित खेती करने से न केवल कुपोषण की समस्या भी हल होगी बल्कि बाजार की उपलब्धता भी आसान होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रयास होना चाहिए कि गरीब का भोजन अमीर का भी भोजन बने। डॉक्टर चंदेल ने कहा कि उत्पादकता पैमाना नहीं बल्कि गुणवत्ता पैमाना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बागवानी के क्षेत्र में 70 प्रतिशत छिड़काव अप्रमाणित है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में छोटे किसान व बागवान का प्राकृतिक खेती की ओर जाना अनिवार्य है । उन्होंने खेती किसानी के बाजार को लेकर कहा कि , हम बदलाव लाएं बाजार की चिंता छोड़ दें। उन्होंने बिना रसायनों से उत्पादन कर धारा के विपरीत चलने की भी बागवानों को सलाह दी। प्रो0 चंदेल ने नर्सरी के लिए विभाग पर निर्भर न रह कर बागवानों से स्वयं नर्सरी का उत्पादन करने की भी सलाह दी। सेब दिवस पर जिला उपायुक्त कुल्लू आशुतोष गर्ग ने अन्य फसलों पर भी इस तरह की गतिविधियां करवाने का भी बागवानी विभाग से आग्रह किया।
