मंडी,धर्मवीर(TSN)-जानवरों को आप चाहे किसी भी चरागाह तक ले जाईए लेकिन वो वापिस अपने गंतव्यों तक पहुंच ही जाते हैं। जानवरों में वापिस अपने गंतव्यों तक पहुंचने के इस व्यवहार को आइआइटी मंडी के शोधकर्ताओं ने समझ लिया है और उसी पर आधारित कुछ मिनी रोबोट्स बनाए हैं।भविष्य में यह रोबोट्स स्वचालित वाहनों के लिए मददगार साबित होंगे और इससे इस क्षेत्र में नई क्रांति आने की उम्मीद है।
आइआइटी मंडी के स्कूल ऑफ फिजिकल साइंसेज के सहायक प्रोफेसर डा. हर्ष सोनी ने अपने शोध के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर कैसे जानवर चरागाह के बाद घर वापस आ जाते हैं।भले ही उन्हें कई बाधाओं व मोड़ों का सामना करना पड़े। शोधकर्ताओं ने इस तथ्य को का समझने के लिए इस शोध में छोटे प्रोग्राम योग्य रोबोट्स का उपयोग किया है। शोधकर्ता डा. हर्ष सोनी ने उदाहरण देते हुए बताया कि होमिंग कबूतर सुरक्षित तरीके से अपना रास्ता खोजने के लिए प्रसिद्ध हैं। वह अपनी कौशलता से लंबी दूरी तक संदेश पहुंचाने के बाद भी वापिस अपने गंतव्य लौट आते हैं। इसी तरह समुद्री कछुए,सामन और मोनार्क तितलियां भी अपने जन्म स्थान पर लौटने के लिए लंबी यात्राएं करते हैं। डा. हर्ष सोनी ने बताया कि इस शोध के निष्कर्ष स्वचालित वाहनों के लिए बेहतर नेविगेशन सिस्टम के विकास और खोज एवं बचाव मिशनों में सुधार के लिए उपयोगी हो सकते हैं। जानवरों के इस होमिंग व्यवहार की नकल करने के लिए आइआइटी मंडी के शोधकर्ताओं ने छोटे रोबोटों का उपयोग करके इन पैटर्नों की जांच की। लगभग 7.5 सेमी व्यास के यह रोबोट वस्तुओं और प्रकाश का पता लगाने के लिए सेंसर से लैस हैं। जिससे वे सबसे चमकीले प्रकाश स्रोत द्वारा चिह्नित घर का पता लगा सकते हैं। रोबोट स्वतंत्र रूप से नियंत्रित पहियों का उपयोग करके किसी वाहन की एक स्थान से दूसरे स्थान पर गति की योजना का अध्ययन करते हैं और प्रकाश की तीव्रता के आधार पर अपने पथ को कुछ जानवरों के समान समायोजित करते हैं।अध्ययन के निष्कर्षों को जर्नल पीआरएक्स लाइफ में प्रकाशित किया गया है।
