लाहौल स्पीति :मनमिन्दर अरोड़ा (TSN)- हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में कड़ाके की ठंड हो गयी है तो हिमाचल के जनजातिया जिला लाहौल स्पीति में भी कड़ाके की ठंड अपना कहर बरपा रही है|लाहौल घाटी में सुबह व शाम के समय तापमान माइनस में जाने के चलते लोगों की भी मुश्किलें बढ़ गयी है। हालांकि दोपहर के समय धूप खिलने से लोगों को थोड़ी राहत तो मिली है लेकिन सुबह व शाम कड़ाके की ठंड के चलते लोग अपने घरों में ही दुबकने को मजबूर हो गए हैं। घाटी में पड़ रही भीषण ठंड से यहाँ के प्राकृतिक पेयजल स्त्रोत जम गए है|सुबह के समय पानी की पाइपे जम रही है | जिसके चलते अब पानी का संकट गहराने लगा है | धुप निकलने के बाद ही पानी की सप्लाई फिर से चालु हो पाती है |
लाहौल के जिलामुख्यालय केलांग में तापमान माइनस 9 से 10 डिग्री तक जा रहा है जबकि ऊपरी इलाकों का हालात और बुरा है|लाहौल के कई ऊपरी इलाकों में तापमान 15 से 20 डिग्री पहुँच रहा है हालांकि दिन के समय धुप खिलने के बाद तापमान थोड़ी बढ़ौतरी होती है लेकिन दिनभर चलने वाली सर्द हवाओं से लोगों की मुश्किलें बढ़ जाती है| यहां बहने वाली अब चंद्र भागा नदी कई स्थानों पर जम गई है | इसके अलावा लाहौल में कई छोटे बड़े नाले और झरने जम चुके हैं| माईनस तापमान के चलते वे लोग दूसरी जगह भी नहीं जा पा रहे हैं। क्योंकि दोपहर के समय बर्फ पिघलने के कारण सारा पानी सड़कों में जमा हो जाता है और माईनस तापमान के चलते पूरी सड़क बर्फ से शीशे की तरह जम जाती है। उस सड़क पर वाहन चलाना भी खतरे से खाली नहीं होता ।
बर्फ़बारी न होने से शुष्क और कड़ाके की ठंड
स्थानीय निवासी अशोक ने बताया की लाहौल में अभी बर्फ़बारी नहीं हुई है, जबकि अभी तक यहाँ दो से ढाई फुट तक बर्फ़बारी हो जाया करती थी |बर्फ़बारी न होने से यहाँ शुष्क और कड़ाके की ठंड पड रही है|जिसके चलते यहाँ टॉयलेट ,पानी की पाइप और सभी प्रकृति झरने जम चुके है | तापमान माइनस 15 डिग्री तक लुढ़क चुका है जबकि लाहौल के कोकसर और लोसर में तापमान माइनस 20 से 25 डिग्री तक जा रहा है | पानी की पाइप जमने से उन्हें गर्म करना पड़ रहा है | स्थानीय रिंगजिंग ने बताया की घाटी में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है |जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है | दिन में धूप काफी देरी से निकलती है और दिन के समय तेज़ सार्ड हवाएं चलती है | सभी प्राकृतिक स्त्रोत अब जमने लगे है | घाटी में अभी तक बर्फ़बारी नहीं हुई है| अगर ऐसा ही रहा तो आगामी सीज़न में घाटी में खेती किसानी के लिए पानी की किल्लत भी होगी |
