राहुल चावला, धर्मशाला: बीजेपी की ओर से जारी की गई उम्मीदवारों की सूची में धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से इस बार राकेश चौधरी को टिकट दी गई है। जैसे ही राकेश चौधरी के नाम की घोषणा धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से की गई थी तो वैसे ही क्षेत्र में उनका विरोध होना भी शुरू हो गया है। आज भले ही उन्होंने अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया लेकिन उसके साथ ही उनका विरोध जताते हुए धर्मशाला भाजपा मंडल ने भापजा टिकट के उम्मीदवार राकेश चौधरी को दलबदलू बताते हुए कड़ा विरोध जताते हुए मंडल अध्यक्ष अनिल चौधरी सहित सभी सात मोर्चों के पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफे जिला अध्यक्ष को भेज दिए है।
भले ही अक्टूबर के महीने में प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला के तापमान में काफी गिरावट आई हो,लेकिन दूसरी तरफ बात धर्मशाला की राजनीति की कि जाए तो इस वक्त सियासी पारा काफी गरमाया हुआ है। जी हां, बात हिमाचल के विधानसभा चुनावों की हो रही है जिसमें भाजपा प्रत्याशियों को वितरित की गई टिकटों को लेकर प्रदेश भर में काफी बबाल मचा हुआ है। वहीं स्मार्ट सिटी धर्मशाला की बात करें तो धर्मशाला में टिकट आवंटन को लेकर काफी गहमागहमी चली हुई है।
बता दें की नवंबर 12 को होने वाले विस चुनावों को लेकर जिस तरह से भाजपा हाई कमान की ओर से धर्मशाला से युवा विधायक विशाल नेहरिया का टिकट काट कर राकेश चौधरी की झोली में डाली है और इस बात पर भाजपा मंडल से हर कोई विरोध कर रहा है।
वहीं धर्मशाला के विधायक विशाल नेहरिया की टिकट किसी ओर को दिए जाने के विरोध में आज धर्मशाला भाजपा मंडल के अध्यक्ष अनिल चौधरी समेत भाजपा के सात मोर्चों से तमाम पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया है। वहीं कार्यकर्ताओं का कहना है कि अगर भाजपा हाई कमान अपना फ़ैसला नहीं बदलती है तो इस बार सरकार जो बार बार मिशन रिपीट करने की बात कर रही है वो नहीं कर पाएगी।
बता दें जब से धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र की टिकट राकेश चौधरी को देने के बाद से धर्मशाला मंडल लगातार धरने कर रहा है। इतना ही नहीं अपने इस्तीफे देते हुए भाजपा मंडल अध्यक्ष अनिल चौधरी, पदाधिकारियों- कार्यकर्ताओं ने कहा कि अगर सरकार को नेहरिया की टिकट काटनी ही थी तो भाजपा मंडल के किसी ओर कार्यकर्ता को टिकट दे सकती थी, लेकिन सरकार ने ऐसा न कर उस व्यक्ति को टिकट दी जिसका भाजपा से दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। भाजपा मंडल धर्मशाला के अध्यक्ष ने कहा है कि अगर सरकार 25 अक्टूबर तक टिकट विशाल नेहरिया को नहीं देती तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।
