Mandi, 12 November-:नेरचौक स्थित लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज से एकमुश्त 41 डॉक्टरों के तबादले के फैसले ने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने इसे मंडी जिले के साथ कांग्रेस सरकार के “भेदभावपूर्ण रवैये” का उदाहरण बताया है।
जमवाल ने कहा कि यह निर्णय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु की “मंडी विरोधी मानसिकता” को उजागर करता है। उनके अनुसार सरकार का यह कदम मंडी के संस्थानों को कमजोर करने की दिशा में उठाया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हाल ही में मंडी के दौरे पर आए थे और वहां “समान विकास” की बात की थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद लिए गए इस फैसले ने सरकार के दोहरे रवैये को उजागर कर दिया है।भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के तीन साल के कार्यकाल में मंडी को लगातार उपेक्षा झेलनी पड़ी है। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल विश्वविद्यालय, जिसे पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने मंडी को शैक्षणिक पहचान देने के लिए स्थापित किया था, उसकी स्थिति भी राजनीति की भेंट चढ़ गई है। सैकड़ों कॉलेजों को शिमला विश्वविद्यालय से जोड़े जाने का निर्णय मंडी की संस्थागत पहचान को कमजोर करने वाला बताया जा रहा है।
जमवाल ने कहा कि चूंकि मंडी की 10 में से 9 विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है, इसलिए सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि मंडी में नए संस्थान खोलने के बजाय पुराने संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज से डॉक्टरों का एक साथ तबादला मंडी की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर डाल सकता है। भाजपा ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो पार्टी आंदोलन का रास्ता अपनाएगी।
