शिमला, कार्तिक-:भाजपा नेता एवं विधायक विपिन परमार ने छोटा शिमला स्थित सचिवालय के बाहर मीडिया से बातचीत में राज्य सरकार पर विकास कार्यों को लेकर उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि शिमला और कांगड़ा जिलों के विधायकों की विधायी प्राथमिकता बैठक आयोजित तो की गई, लेकिन सरकार इसे केवल औपचारिक प्रक्रिया तक सीमित रख रही है।
परमार ने बताया कि बैठक में भाजपा विधायकों ने लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और लंबे समय से लंबित डीपीआर से जुड़े अहम विकास मुद्दे प्रमुखता से उठाए। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में सड़कों, फ्लो इरिगेशन और पेयजल योजनाओं के प्रस्ताव वर्षों से स्वीकृति और डीपीआर के इंतजार में अटके हुए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर विकास प्रभावित हो रहा है।उन्होंने मांग की कि यदि सरकार विधायी प्राथमिकता बैठक आयोजित कर रही है, तो विधायकों की प्राथमिकता किट्टी की राशि में वृद्धि की जानी चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर जरूरी विकास कार्य समय पर पूरे हो सकें।
विपिन परमार ने आरोप लगाया कि विधायक क्षेत्र विकास निधि, जो आपदा एवं आकस्मिक जरूरतों के लिए चार किस्तों में दी जाती थी, उसकी दो किस्तें समाप्त कर दी गई हैं। उन्होंने कहा कि जो राशि स्वीकृत भी हुई है, वह जिला स्तर से पास होने के बावजूद ट्रेजरी से जारी नहीं की जा रही। यही स्थिति ऐच्छिक निधि की भी है, जिससे गरीब, बीमार, जरूरतमंद परिवारों, बेटियों के विवाह और युवा खिलाड़ियों की सहायता की जाती है, लेकिन उसका भुगतान भी लंबित है।उन्होंने बताया कि बैठक में अन्य भाजपा विधायकों ने भी अपने-अपने क्षेत्रों से जुड़े मुद्दे मजबूती से उठाए। विधायक विक्रम ठाकुर ने विकास कार्यों की तथ्यात्मक स्थिति रखी, पवन काजल ने शिक्षा और सड़क सुविधाओं से जुड़े विषय उठाए, जबकि रणवीर सिंह निक्का ने चक्की क्षेत्र में अवैध खनन और बाहरी राज्यों के हस्तक्षेप का मुद्दा सामने रखा।
परमार ने कहा कि वर्ष 2022 से पहले भाजपा सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत अस्पताल, पुल, सड़कें, भवन, रेस्ट हाउस, पॉलिटेक्निक कॉलेज और आईटीआई जैसे कई विकास कार्य आज भी अधूरे पड़े हैं, लेकिन वर्तमान सरकार ने उनके लिए अब तक कोई बजट जारी नहीं किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायकों ने सरकार से स्पष्ट आग्रह किया है कि उद्घाटन का श्रेय लेने से पहले अधूरे प्रोजेक्ट्स को जल्द पूरा किया जाए।अंत में उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से भाजपा विधायक लगातार क्षेत्रीय और प्रदेश के मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई दे रही। सरकार को औपचारिक बैठकों से आगे बढ़कर वास्तविक विकास पर ध्यान देना चाहिए।
