नाहन (देवेन्द्र कुमार): सिरमौर जिला की रेणुका जी में प्रस्तावित 40 मेगावाट की महत्वपूर्ण रेणुका जी बांध परियोजना से विस्थापित होने वाले लोग अब आंदोलन की तैयारी में है। आरोप है कि सरकार द्वारा इनकी मांगों पर कोई गौर नहीं किया जा रहा है। इस बहुउद्देश्यीय परियोजना से एक तरफ जहां देश की राजधानी दिल्ली को पानी की सप्लाई होंगी, वहीं दूसरी तरफ 40 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन होगा। रेणुका जी बांध परियोजना का कुछ माह पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिलान्यास किया है। शुरुआती चरण में परियोजना पर करीब 7 हजार करोड रुपए की राशि खर्च किए जा रहे है। मगर काम शुरू होने से पहले ही अब विरोध के सुर यहां बुलंद होने लगे है।
सिरमौर जिला मुख्यालय नाहन पहुंचे रेणुका जी बांध विस्थापितों ने बताया कि सरकार द्वारा उनकी मांगों पर कोई गौर नहीं किया जा रहा है और जो वायदे उनसे किए गए थे वो पूरे नही किए जा रहे है। लोगों का कहना है कि विस्थापन के बाद उनके लिए जो जमीने देखी गई है और वह कृषि योग्य नहीं है। जिसका शुरू से ही विरोध किया जा रहा है मगर इस बात को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। विस्थापितों का यह भी कहना है कि रेणुका जी बांध परियोजना में विस्थापितों को प्रमुखता के आधार पर रोजगार मिलना चाहिए था, परंतु यहां नेताओं के इशारों पर बाहर से आउटसोर्स भर्तियां की जा रही है। रेणुका जी संघर्ष बांध समिति अध्यक्ष योगेंद्र कपिला का कहना है कि रेणुका जी बांध परियोजना के निर्माण से यहां 17 पंचायतों के करीब 1142 परिवार विस्थापित हो जाएंगे।
विस्थापित होने वाले लोगों का यह भी कहना है कि अपनी मांग को लेकर वह तीन बार मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मुलाकात कर चुके हैं। मगर उनसे सिर्फ आश्वासन ही मिल पाए हैं धरातल पर कोई भी काम विस्थापितों के हितों में नहीं हुआ है। विस्थापित होने वाले लोगों ने जहां एफआरआई देहरादून द्वारा बांध निर्माण को लेकर करवाए गए एसआईए सर्वे पर भी सवाल उठाए जा रहे है। लोगों का कहना है कि बांध निर्माण से यहां गिरिपार क्षेत्र की करीब 20 किलोमीटर की दूरी बढ़ जाएंगी जो सिर्फ 14 किलोमीटर बताई जा रही है।
