अनिल कुमार, किन्नौर: सितंबर माह में मौसम ने अपना रंग बदल दिया है और किन्नौर जिला की ऊंची पहाड़ियों पर बर्फबारी ने भी दस्तक दी है। जिला की ऊंची पहाड़ियों पर ताजा हिमपात हुआ है। हिमपात होने की वजह से जिला के पहाड़ चांदी के रंग में रंग चुके मां पहाड़ों पर सफेद चादर बिछी नजर आ रही है। बर्फबारी की वजह से इलाके में तापमान भी सुनने से नीचे चला गया है। जिला के कुनो चारंग व अन्य ऊंचाई वाले पहाड़ियों पर हुई बर्फ़बारी से सफ़ेद चादर ने पहाड़ो को अपने आगोश में ले लिया है।
वहीं हांगरंग घाटी के सबसे ऊंचे गांव नाको के मध्य स्थित प्राकृतिक झील जिसका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है इस झील के जलस्तर में भी कमी दर्ज की गई है। झील का जलस्तर कम होने क़ा मतलब हैं कि अब जिला में बर्फबारी क़ा दौर कभी भी शुरू हो सकता है। नाको झील क़ा जलस्तर इन दिनों काफी कम हुआ है और इस झील के पानी में हाथ लगाते ही हाथ जमने शुरू हो जाते है।
नाको झील का जलस्तर कम होने को ही स्थानीय लोग सर्दी की शुरुआत मानते है। अब इस झील के आसपास जाने से ही शरीर की हड्डीयां भी जम सकती है। ऐसे में झील के समीप जाने के लिए पर्यटकों व स्थानीय लोगों को मोटे गर्म कपड़े पहनने की आवश्यकता पड़ती है।
वहीं जिला के निचले क्षेत्रों मे बारिश व ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के चलते क्षेत्र अब शीतलहर की कहर की चपेट मे आ गया है। नाको झील के आसपास नाको गांव क़ा रिहायशी इलाका बसता है यहां के लोग झील के जलस्तर के कम होने और तापमान के शून्य होते ही समय से ही घर के अंदर दुबक जाते है क्योंकि इस झील की ठंडक सुबह व शाम को बहुत अधिक बढ़ जाती है। इस पवित्र झील क़ा पानी इतना साफ है कि इसे नाको गांव क़ा दर्पण भी माना जाता है जिसमे नाको गांव दिखता है ओर ऐसा प्रतीत होता है मानो झील के अंदर पूरा गांव बस गया हो।
नाको झील में ठंड के चलते इन दिनों पर्यटकों की संख्या भी कम हुई है लेकिन अक्टूबर माह के बाद झील पूरी तरह से जमना शुरू हो जाती है ऐसे में इस झील के ऊपरी तरफ साहसिक खेल जिसमें आईस स्केटिंग, फुटबाल खेल प्रतियोगिताये भी ग्रामीणों की ओर से करवाई जाती है। ऐसे में सर्दियों में नाको घूमने आए पर्यटक भी झील के ऊपर सर्दियों के खेलों का आनंद लेते है।
बताते चले कि जिला के हाँगरंग,भावा वैली, सांगला वैली मे मौसम खराब है लेकिन चीन सीमांत क्षेत्र कुनो चारंग में सुबह मौसम का मिजाज सुहावना था,लेकिन अब कुनोचारंग मे मौसम एक बार फिर खराब होते ही वहां के हालत भी बदल रहे है, जिला में इस प्रकार मौसम का मिजाज रहा तो जल्द ही निचले इलाकों में भी बर्फबारी की संभावना भी बनी हुई है।
