Hamirpur, 5 November -:ग्रामीण आजीविका सशक्तिकरण और मत्स्य पालन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, हिमाचल प्रदेश सरकार हमीरपुर ज़िले के नादौन में 25 करोड़ रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक मत्स्य अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने जा रही है। परियोजना हेतु भूमि चयनित कर ली गई है और आईसीएआर-सीआईएफए, भुवनेश्वर द्वारा इसका विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किया गया है।यह केंद्र न केवल रोज़गार और स्व-रोज़गार के अवसरों को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय युवाओं और किसानों को आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाएगा।
परियोजना के तहत उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज उत्पादन, मत्स्य आहार निर्माण, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण और विपणन की सुविधाएँ विकसित की जाएंगी। इससे मत्स्य पालन क्षेत्र एक लाभदायक और टिकाऊ उद्यम के रूप में स्थापित होगा।केंद्र में फ्रेश वाटर एक्वा कल्चर तकनीकों के प्रदर्शन और प्रशिक्षण के लिए आधुनिक इकाइयाँ होंगी। बेरोजगार युवाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।इस एकीकृत परियोजना में भारतीय मेजर कार्प (रोहू, कतला, मृगल), विदेशी कार्प (हंगेरियन, अमूर स्ट्रेन), माइनर कार्प, कैटफिश (पंगेसियस, मुर्रेल) और सजावटी मछलियों (गोल्ड फिश, कोई कार्प, गप्पी, मौली) के उच्च गुणवत्ता वाले बीज उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, पार्क में आधुनिक हैचरी, नर्सरी, पालन इकाइयाँ, बायोफ्लोक और रीसर्क्युलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), फीड मिल, सजावटी मछली इकाइयाँ, सार्वजनिक एक्वेरियम, विपणन एवं इनक्यूबेशन केंद्र, क्वारंटीन प्रयोगशाला और अपशिष्ट उपचार संयंत्र जैसी सुविधाएँ शामिल होंगी।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। मत्स्य पालन ऐसा क्षेत्र है जो किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकता है। विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि किसानों को आधुनिक मछली उत्पादन पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए ताकि वे अपनी मेहनत का उचित मूल्य प्राप्त कर सकें।
