राहुल चावला,धर्मशाला (TSN) : इस बार बरसात हिमाचल प्रदेश में डरावनी रही हैं। बरसात तो पहले भी होती रही है लेकिन इस बार बरसात की वजह से हिमाचल प्रदेश में भारी नुकसान हुआ हैं। उन्होंने बताया कि चेरापूंजी के बाद धर्मशाला में भारी मात्रा में बरसात होती थी लेकिन आज लगता है कि सबसे ज्यादा बारिश शिमला में हुई हैं। उन्होंने बताया की किस तरह से कुल्लू-मनाली और जिला चंबा में बरसात की वजह से प्रलय आई है और इस बारिश की वजह से बहुत से घर बह गए हैं। काफी मात्रा में संपत्ति को नुकसान हुआ हैं। बहुत से लोगों की जान भी गई हैं। यह बात बुधवार को धर्मशाला में आयोजित पत्रकार वार्ता में कैबिनेट मंत्री प्रोफेसर चौधरी चंद्र कुमार ने कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में आपदा की इन परिस्थितियों में प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने ऐसा कोई रास्ता नहीं छोड़ा है जहां पर मुख्यमंत्री नहीं गए हो। उन्होंने बताया कि कांगड़ा जिला में भी नुकसान हुआ है लेकिन जितना नुकसान कुल्लू मनाली और शिमला जिला में हुआ हैं उतना नुकसान कांगड़ा जिला में नहीं हुआ हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में जितने भी डैम अथॉरिटी हैं चाहे वह पौंग डैम हो या अन्य डैम अथॉरिटी हो कोई भी रिहर्सल नहीं करती है। समय-समय पर अपने डैम के गेटों को भी चेक नहीं करते हैं और जब आपदा की घड़ी आती है तो बिना किसी सूचना के डैम के गेट को खोल देते हैं जिस कारण तबाही का मंजर सामने आता हैं।
उन्होंने कहा कि कम से कम जितने भी डैमअथॉरिटी है उन सभी को अपनी कार्य प्रणाली को सुधारना चाहिए। डैम अथॉरिटी हमेशा बहाने लगाती आई है कि पीछे से पानी का बहाव ज्यादा है इसलिए हमे गेट्स खोलने पड़े हैं। मुख्यमंत्री ने भी डैम अथॉरिटी से बात की है और कहा भी है की जितना नुकसान डैम से पानी छोड़ने की वजह से हुआ है उन सब की भरपाई भी आपको ही करनी पड़ेगी।
भारत सरकार से नहीं मिली कोई मदद
उन्होंने बताया की अभी तक भारत सरकार से कोई भी मदद नहीं आई है और हिमाचल प्रदेश में इतनी आपदा आई है इसको भी राष्ट्रीय आपदा घोषित करना चाहिए था लेकिन राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया गया। उन्होंने बताया की विपक्ष के नेता ने भी कोई भी ज्ञापन नहीं दिया हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री देश के प्रधानमंत्री से मिले और इतनी बड़ी जलप्रलय उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में हुई और देश के प्रधानमंत्री ने एक दिन भी कोई भी चर्चा नहीं की। उन्होंने बताया की भारत सरकार को सभी राजनितिक पार्टियों को एक ही दृष्टि के साथ देखना चाहिए।
