भावना शर्मा: देव भूमि हिमाचल में आज भी लोग औषधीय गुणों से भरपूर जंगलों में मिलने वाली जड़ी बूटियों का अपने खान पान में इस्तेमाल करते हैं। सीजन में जो भी जड़ी बूटियां जंगलों में लगती हैं हिमाचल के लोग इन्हें अपने खाने में शामिल करना नहीं भूलते हैं। ऐसा इसलिए भी है क्योंकि इन औषधियों से बनने वाली सब्ज़ी जहां खाने में तो स्वादिष्ट होती ही है तो वहीं सेहत के लिए भी यह बेहद फायदे मंद होती हैं। ऐसी ही एक जड़ी बूटी से हिमाचल के निचले क्षेत्रों के जंगल इन दिनों भरे पड़े हैं।
यह औषधि कोई और नहीं बल्कि कचनार हैं जिसे स्थानीय भाषा में हिमाचल में कराली या फिर क्षेत्र के बोली के अनुसार अलग अलग नाम से जाना जाता हैं। कचनार का एक बड़ा वृक्ष होता है जिसमें फूल और कलियां दोनों ही खाने में इस्तेमाल की जाती हैं। इसके फूल और कलियों से हिमाचल में सब्जी बनाई जाती हैं। यह वृक्ष हर एक मायने में काम आने वाला वृक्ष होता हैं। एक और जहां इस वृक्ष की लकड़ी का इस्तेमाल जलाने के लिए किया जाता है तो वहीं इसकी पत्तियों का इस्तेमाल पशुओं के चारे के लिए होता हैं,वहीं इसकी छाल का इस्तेमाल आयुर्वेद में दवाइयों को बनाने तो इस पर लगने वाले फूलों और कलियों का इस्तेमाल हिमाचल के लोग सब्जी के रूप में करते हैं। इस पेड़ की कलियों से और इसके फूलों से सब्जी के साथ ही आचार और रायता भी बनाया जाता हैं।
गर्मियों के दस्तक देते ही कचनार के वृक्ष जंगलों में फूलों और कलियों से भर उठते हैं। यह देखने में जहां आकर्षक लगते हैं तो इसके गुण भी उतने ही औषधियों होते हैं। सफेद,पीले,गुलाबी रंग के यह फूल है देखने में बेहद ही आकर्षक लगते हैं। हम लोग इन दिनों हिमाचल में लोग इस पौधे की कलियां और फूलों को तोड़कर अपने घर ला रहे हैं और इसकी सब्जी बना रहे हैं तो वहीं बाजारों में भी इन दिनों यह फूल है सब्जी की दुकानों पर बिक्री के लिए आसानी से उपलब्ध हो रहा हैं।
इन रोगों को दूर करता है कचनार
कचनार का पेड़ अपने आप में ही एक औषधीय पेड़ हैं। इसकी छाल का इस्तेमाल जहां आयुर्वेद में दवाई बनाने के लिए किया जाता हैं,तो वहीं इसकी कलियां और है फूल भी अनेक रोगों को दूर करने में कारगर साबित होते हैं। कचनार की कलियों और फूलों के सेवन से त्वचा संबंधी रोग,फोड़े फिंसियां, एक्जीमा,रक्त विकार को दूर करने में कारगर हैं। कचनारा कई पोषक तत्वों से भरपूर हैं। इसमें मुख्य रूप से विटामिन सी और कुछ आवश्यक खनिज भी पाए जाते हैं। कचनार की छाल का काढ़ा पीने से हाइपोथाइरॉएडिज्म में लाभ मिलता हैं। इसके अर्क या पाउडर के इस्तेमाल से पाचन तंत्र को शांत करने में मदद मिलती हैं। यह एक बेहतरीन ब्लड प्यूरीफायर का काम भी करता हैं जो प्राकृतिक तरीके से रक्त को साफ करता हैं। हाई ब्लड शुगर सहित पीरियड के दौरान बहुत अधिक या बहुत कम मात्रा में रक्त स्राव की समस्या को ठीक करने में भी कचनार बेहद कारगर औषधि के रूप में कार्य करता हैं। कचनार के पेड़ की छाल शरीर में होने वाली गांठों को दूर करने के लिए भी बेहद कारगर साबित होती हैं। वहीं कचनार की छाल और इसकी फुल पतियों की तासीर ठंडी होती हैं,ऐसे में गर्मियों में लोग इसका सब्जी के रूप में सेवन जरूर करते हैं जिससे की यह उनके शरीर को ठंडक पहुंचाती हैं।
पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से होती हैं कचनार तैयार
आजकल के दौर में हम जिन भी फलों और सब्जियों का इस्तेमाल अपने खान-पान में कर रहे हैं वह सभी केमिकल से भरे हुए हैं जिससे पोषक तत्व शरीर को नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में जंगलों में उगने वाले कचनार और इसके साथ ही अन्य जड़ी बूटियां पूरी तरह से प्राकृतिक तरीके से तैयार होती हैं। इसमें किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता हैं, जिसकी वजह से इनके गुण और भी ज्यादा बढ़ जाते हैं। इसका शरीर पर किसी तरह का कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता हैं और इनमें उपलब्ध सभी पोषक तत्व भी शरीर को प्राप्त होते हैं।
बाजारों में कचनार बिक रही 100 रुपए किलो के भाव
हिमाचल के जगलों में मिलने वाली कचनार हिमाचल में सब्जी विक्रेताओं की दुकानों पर भी आजकल आराम से उपलब्ध हो जाती है लेकिन इसकी कीमत भी इसके औषधीय गुणों को देखते हुए काफी ज्यादा रहती है बाजारों में इन दिनों यहां सब्जी 80 से 100 रुपए किलो के बीच में बिक रही हैं। जिन लोगों के आसपास कचनार का पेड़ उपलब्ध नहीं होता वह सब्जी की दुकानों से ही कचनार की कलियों और फूलों को खरीद कर इसकी सब्जी, रायता या फिर अचार बना रहे हैं।
