रामपुर बुशहर (एकता): हिमाचल में मेले एवं त्योहारों का अपना ही एक खास महत्व है। कुछ मेले और त्योहार देश ही नहीं पूरे विश्व में एक अलग पहचान बनाते हैं। 17वीं शताब्दी से शुरू हुआ यह लवी मेला आज भी अंतरराष्ट्रीय मेले के नाम से पूरे विश्व में जाना जाता है। यह मेला 300 साल का इतिहास समेटे हुए हैं। पुराने समय में यहां के ऊन, पश्मीना, चिलगोजा और स्थानीय उत्पाद की भारत ही नहीं विदेशों में भी बड़ी मांग थी।

300 साल का इतिहास समेटे हुए है यह मेला
लवी मेला तीन शताब्दी पुराना है और यह पहाड़ी संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। लवी व्यापार मेले में जनजातीय उत्पाद और संस्कृति की झलक मिलती है। हर साल अरबों रुपए का कारोबार लवी मेले में होता है। मेले में लोगों को अपनी जरूरत की वस्तुएं खरीदने का अवसर मिलता है।

बता दें कि यह मेला मध्य शताब्दी में तत्कालीन बुशहर रियासत के राजा केहरी सिंह के समय शुरू हुआ था। उस समय मेले में तिब्बत, अफगानिस्तान के व्यापारी यहां कारोबार करने आते थे। वहां के व्यापारी ड्राईफ्रूट, ऊन, पशम लेकर रामपुर पहुंचते थे। इसमें सांस्कृतिक संध्याएं भी आयोजित की जाती हैं, जिसमें हिमाचली कलाकारों के साथ ही वॉलीबुड के नामी गायक प्रस्तुति देंगे।

1985 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया गया घोषित
300 साल पुराने रामपुर लवी मेले का आगाज साल 1985 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित किया गया। साल 1983 में पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद वीरभद्र सिंह ने 1985 में इस मेले को घोषित किया था। तब से लेकर आज तक मेले के वैभव एवं स्तर को बरकरार रखने के लिए सरकार कोशिश कर रही है।

