Kangra, Sanjeev -:जिला कांगड़ा का सिविल अस्पताल नूरपुर इन दिनों लगातार चर्चा में बना हुआ है। चार विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ चम्बा के सीमावर्ती इलाकों और पड़ोसी राज्य पंजाब से भी बड़ी संख्या में मरीज यहां उपचार के लिए पहुंचते हैं। बढ़ते मरीजों का दबाव तो है, लेकिन अस्पताल में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित कर रही है।
अस्पताल में कुल 34 स्वीकृत डॉक्टरों के पद हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 22 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। शेष 12 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। रेडियोलॉजिस्ट और पीडियाट्रिक स्पेशलिस्ट की अनुपस्थिति सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है, जिससे कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। सामान्य स्टाफ की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। इतना ही नहीं, अस्पताल में एक ड्राइवर का पद खाली होने के कारण एम्बुलेंस संचालन और आपातकालीन सेवाओं को भी समय-समय पर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अनुपमा शर्मा का कहना है कि अस्पताल को सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी रिक्त पदों का भरना बेहद जरूरी है। इसके लिए उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर स्थिति से अवगत करवा दिया गया है।दूसरी ओर, अस्पताल में उपचार करवाने पहुंचने वाले मरीजों का कहना है कि उपलब्ध डॉक्टर और स्टाफ पूरी निष्ठा और मेहनत से सेवाएं दे रहे हैं। मरीजों के अनुसार—“जितना भी स्टाफ तैनात है, वे पूरी ईमानदारी से काम कर रहे हैं और हमें बेहतर इलाज मिल रहा है।”
अस्पताल प्रबंधन ने व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए पर्ची बनवाने हेतु पुरुष, महिलाएं, वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांगजन के लिए अलग-अलग लाइनें बनाई हैं। साथ ही दवाइयों की सुविधा भी अस्पताल परिसर में ही आसानी से उपलब्ध करवाई जा रही है।नूरपुर सिविल अस्पताल में डॉक्टरों व स्टाफ की कमी अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। लोगों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए इन पदों को शीघ्र भरना बेहद आवश्यक है, ताकि क्षेत्र के हजारों मरीजों को निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
