विकास शर्मा, चिंतपूर्णी: जसवां-परागपुर में जन आंकाक्षाओं की अनदेखी हुई है, लेकिन अब कोरे वादों से काम नहीं चलने वाला है। झूठे आश्वासन देकर प्रतिनिधित्व करने वाले अब बच नहीं सकते। इन मुद्दों पर जबावदेही सुनिश्चित करनी ही होगी। यह बात रविवार को बणी पंचायत में जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान समाजसेवी संजय पराशर ने कही। उन्होंने कहा की वह क्षेत्र में शिक्षा के उत्थान और युवाओं को रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में विजन के साथ काम कर रहे है।
संजय ने कहा कि शिक्षा का अर्थ किसी व्यक्ति को हुनरमंद बनाने के साथ भी जुड़ा हुआ है। हुनर या कौशल होगा तो रोजगार के साधन भी उपलब्ध हाेंगे। तकनीकी और व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने की बजाय क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों का हाल ऐसा है कि वहां पर्याप्त स्टाफ ही नहीं है। प्राथमिक स्तर की शिक्षा में बच्चों की नींव कमजोर रह रही है। उन्होंने कहा कि वह गुणवत्ता युक्त प्रारंभिक शिक्षा के लिए शिद्दत व नेक नियत से काम करेंगे। कोई हाथ बेरोजगार न हो, इसके लिए भी उन्होंने प्रयास कोरोनाकाल से ही शुरू कर दिए थे। इस वर्ष भी एक हजार से ज्यादा युवाओं को नौकिरयों दिलाने में भूमिका निभाई है।
पराशर ने कहा कि उनका लक्ष्य एक वर्ष में पांच हजार राेजगार के नए साधनों का सृजन करना है। इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित कंपनियों को जसवां-परागपुर में अपने क्षेत्रीय कार्यालय खोलने के लिए आंमत्रित किया जा रहा है। युवा इन कंपनियों में काम कर सकें, इसके लिए क्षेत्र में खोले गए 40 इंग्लिश लर्निंग व कंप्यूटर सेंटर्स में अंग्रजी भाषा ओर कंप्यूटर भी सिखाया जा रहा है।
संजय पराशर ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाए ओर कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी रस्म अदायगी से ही काम चलाया जाता रहा है। कोरोनाकाल में कमजोर स्वास्थ्य ढांचा किसी से छिपा नहीं रहा। अच्छा होता कि इस विपदा के बाद स्वास्थ्य संस्थानों में सुविधाओं को बढ़ाया जाता, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। उन्होंने कहा कि विकास वो होता है, जहां शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन और नारी सशक्तीकरण जैसे सरोकारों पर पारदर्शिता के साथ काम होता दिखाई दे, लेकिन विडंबना यह है कि जसवां-परागपुर में इन मुद्दों पर न तो काम हुआ और न ही किसी ने इन विषयों पर सार्थक चर्चा करने की बात की।
संजय ने सवाल करते हुए कहा कि देश को आजाद हुए 75 वर्ष से ज्यादा का समय बीत गया है, ऐसे में क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं पहुंचने में कितना वक्त लगेगा। पराशर ने कहा कि जसवां-परागपुर में हर क्षेत्र में कार्य करने की आवश्यकता है और समाज के हर पक्ष को सशक्त व सक्षम बनाने की जरूरत है। ऐसे में उनका प्रयास रहेगा कि आमजनमानस के साथ मिलकर जसवां-परागपुर क्षेत्र के भविष्य को संवारने का प्रयास किया जाए। कोरानाकाल के बाद उन्होंने जनसेवा के लिए हरसंभव सहयोग व योगदान दिया है।
