हमीरपुर,अरविन्द सिंह(TSN)-ग्राम पंचायत बोहनी,बस्सी झनियारा नेरी पंचायत के गांव नेरी व नेरी हर्बल के ग्रामीणों का एक प्रतिनिधिमंडल नगर निगम में शामिल न करने की मांग का लेकर उपायुक्त से मिला।काफी संख्या में तीनों पंचायतों के लोग एकत्रित होकर उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। ग्रामीणों का कहना है कि नगर निगम में शामिल करने से लोगों पर टैक्स का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। गांवों में गरीब परिवार रहे हैं.ऐसे में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ेगा। दोनों पंचायत के प्रतिनिधिमंडल ने मांगपत्र उपायुक्त हमीरपुर को सौंपा।
ग्रामीणों ने बताया कि 23 नवंबर 2024 को शहरी विकास विभाग ने अधिसूचना जारी की है जिससे स्पष्ट हो रहा है कि धलोट पंचायत के अंतर्गत आने वाले गांवों को नगर निगम हमीरपुर में शामिल किया जा रहा है।इलाका वासी नगर निगम हमीरपुर में शामिल नहीं होना चाहते।लोगों का कहना है कि पंचायती राज संस्थाओं में लोगों की सहभागिता ज्यादा रहती है तथा प्रत्यक्ष रूप से पंचायतों के साथ जुड़े हुए हैं।पंचायत के सभी विकास कार्यों में ग्रामीणों की सहभागिता होती है. शहरीकरण से ठेकेदारी प्रथा शुरू हो जाएगी।
पंचायत में कई गरीब परिवार,नगर निगम में शामिल होने से पड़ेगा टैक्स का बोझ
बता दे कि जिला हमीरपुर में 11 पंचायतों को नगर गत दिन दडूही पंचायत और बजूरी,गसोता,दरबैली,बलौंगनी,धलोट , बरोहा व भरनांग पंचायत ओर अब बोहनी, बस्सी झनियारा नेरी पंचायत के गांव नेरी,धरोग व अमरोह पंचायत के ग्रामीण उपायुक्त हमीरपुर के कार्यालय में पहुंचे। ग्रामीणों नगर निगम में शामिल किए जाने पर विरोध कर उपायुक्त हमीरपुर को सौंपा ज्ञापन।ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में गरीब लोग रहते है जो नगर निगम में शामिल होने पर नगर निगम का भारी भरकम टैक्स का भुगतान नहीं कर सकते है।ग्रामीणों ने उपायुक्त से मांग की है कि लोगों को पंचायतों में ही रहने दिया जाए।
जो सुविधाएं पंचायतों में मिलती है वो सुविधाएं नगर निगम में नहीं
वहीं अमरोह पंचायत के रोशन लाल ने कहा कि अमरोह पंचायत के दो गांव छवोट ओर चुनाहल के लोग नगर निगम में नहीं जाना चाहते है।उन्होंने कहा कि दोनों गांवों को नगर निगम से बाहर निकाला जाए।वहीं धरोग पंचायत के प्रधान चंद्र शेखर ने बताया कि कैहडरु गांव के लोग नगर निगम में शामिल नहीं होना चाहते है।उन्होंने कहा कि नगर निगम में शामिल होने का बाद लोगों को जो पंचायतों में मूलभूत सुविधाएं मिलती थी वो अब नगर निगम में शामिल होने का बाद नहीं मिल पाएगी।
वहीं पंचायत बोहनी के राज कुमार ने बताया कि बोहनी गांव को नगर निगम में शमिल किया जा रहा है।ग्रामीण नगर निगम में शामिल नहीं होना चाहते। गांव में गरीब परिवार रहते हैं तथा नगर निगम में शामिल होने से इनके ऊपर टैक्स का बोझ पड़ेगा।लोग मनरेगा में दिहाड़ी लगाकर,पशुपालन से जीवन यापन करते हैं।वहीं बस्सी झनियारा पंचायत के स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि ग्रामीण नगर निगम में शामिल नहीं होना चाहते। गांवों में गरीब परिवार रहते हैं तथा नगर निगम में शामिल होने से इनके ऊपर टैक्स का बोझ पड़ेगा। लोग मनरेगा में दिहाड़ी लगाकर,पशुपालन से जीवन यापन करते हैं।
वहीं नेरी गांव के स्थानीय व्यक्ति ने बताया कि हमारा गांव नगर निगम में शामिल नहीं होना चाहता है।उन्होंने कहा कि जिसको लेकर आज उपायुक्त हमीरपुर के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन भी सौंपा है।उन्होंने कहा कि 80 प्रतिशत खेती योग्य भूमि है और सभी खेती बाड़ी करते है।उन्होंने कहा कि नगर निगम में शामिल होने के बाद लोग बारी भरकम टैक्स नहीं दे पाएंगे।
