Solan, 27 October –हिमाचल प्रदेश सीटू का 15वां राज्य सम्मेलन सोलन के बजरोल स्थित मोनाल बैंक्विट हॉल में आरंभ हुआ। यह तीन दिवसीय सम्मेलन 28 अक्तूबर तक चलेगा। सम्मेलन का उद्घाटन अखिल भारतीय सीटू के महासचिव एवं पूर्व राज्यसभा सांसद कॉमरेड तपन सेन ने किया। इस अवसर पर एटक के प्रदेश अध्यक्ष कॉमरेड जगदीश भारद्वाज ने शुभकामनाएं दीं।
सम्मेलन में हिमाचल किसान सभा, जनवादी महिला समिति, एसएफआई, डीवाईएफआई और पेंशनर्स एसोसिएशन जैसे भाई संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। इस मौके पर किसान सभा के राज्य अध्यक्ष कॉमरेड कुलदीप तंवर, एसएफआई के राज्य सचिव कॉमरेड सनी, डीवाईएफआई के राज्य सचिव कॉमरेड सुरेश सरवाल, तथा जनवादी महिला समिति की प्रदेश अध्यक्ष कॉमरेड फालमा चौहान ने मजदूर–किसान–महिला–युवा एकता को मज़बूत करने और संयुक्त संघर्ष की आवश्यकता पर बल दिया।उद्घाटन भाषण में कॉमरेड तपन सेन ने कहा कि देश की नीतियाँ आज पूरी तरह पूंजीपतियों के हित में काम कर रही हैं। श्रम संहिताओं के माध्यम से मजदूरों के अधिकारों को खत्म किया जा रहा है और ठेका प्रथा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने मिड डे मील, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की दुर्दशा का उल्लेख करते हुए कहा कि यह वर्ग न्यूनतम वेतन से भी वंचित है।
कॉमरेड सेन ने कहा कि आने वाले समय में देशभर में मजदूर वर्ग एक व्यापक आंदोलन की तैयारी कर रहा है। मजदूर, किसान, महिला और युवा आंदोलनों का संयुक्त संघर्ष केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ और मज़बूत होगा।सम्मेलन को सीटू प्रदेश अध्यक्ष कॉमरेड विजेंद्र मेहरा, महासचिव कॉमरेड प्रेम गौतम, राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड कश्मीर सिंह ठाकुर तथा राष्ट्रीय नेतृत्व से कॉमरेड के.एन. उमेश ने भी संबोधित किया। तीन दिवसीय सम्मेलन में प्रदेशभर से लगभग 300 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन में संगठन, आंदोलन और श्रमिक वर्ग की मौजूदा चुनौतियों पर चर्चा के साथ अगले तीन वर्षों की संघर्ष रूपरेखा तय की जा रही है।
वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड मजदूर विरोधी हैं, जिनसे 70% उद्योग और 74% मजदूर श्रम कानूनों के दायरे से बाहर हो जाएंगे। हड़ताल पर कठोर सजाएँ और जुर्माने लगाए जाएंगे तथा काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 किए जा रहे हैं, जिससे बंधुआ मजदूरी को बढ़ावा मिलेगा।
ये हैं मुख्य मांगे
- मजदूरों का न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये तय किया जाए,
- आंगनबाड़ी, आशा और मिड डे मील कार्यकर्ताओं को सरकारी कर्मचारी घोषित कर ग्रेच्युटी लागू की जाए,
- ओल्ड पेंशन स्कीम बहाल की जाए,
- मनरेगा मजदूरों को 600 रुपये प्रतिदिन का वेतन और 200 दिन का कार्य दिया जाए,
- ठेका व आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित किया जाए,
- और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण को रोका जाए।
