शिमला,समर एक्सप्रेस -:जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) ट्रस्ट की बैठक आज उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में ट्रस्ट को प्राप्त विभिन्न विकास प्रस्तावों की समीक्षा की गई तथा उनके क्रियान्वयन से पहले फील्ड स्तर पर सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के कल्याण और विकास के उद्देश्य से गठित एक महत्वपूर्ण संस्था है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा खनिज एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2015 के तहत प्रत्येक खनन जिले में डीएमएफ ट्रस्ट की स्थापना का प्रावधान किया गया है। इसी व्यवस्था के तहत हिमाचल प्रदेश के खनन प्रभावित जिलों में भी यह ट्रस्ट सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।बैठक के दौरान बताया गया कि ट्रस्ट को अब तक 19 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 67 लाख 91 हजार 739 रुपये है। उपायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी प्रस्तावों की दोबारा समीक्षा की जाए और फील्ड वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से किया जाए, ताकि वास्तविक जरूरतों के अनुसार ही योजनाओं को स्वीकृति दी जा सके।उन्होंने यह भी जानकारी दी कि फरवरी 2026 तक जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट के पास कुल 2 करोड़ 84 लाख रुपये की राशि एकत्रित हो चुकी है। यह राशि मुख्य रूप से खनन कंपनियों और खनन पट्टाधारकों द्वारा दी जाने वाली अनिवार्य योगदान राशि से प्राप्त होती है। खनिज उत्पादन पर निर्धारित प्रतिशत के आधार पर कंपनियों को डीएमएफ में योगदान देना होता है, जो जिला स्तर पर बनाए गए ट्रस्ट में जमा किया जाता है और उसी जिले के विकास कार्यों में खर्च किया जाता है।
उपायुक्त ने बताया कि प्रदेश सरकार ने हाल ही में खनन प्रभावित क्षेत्रों की परिभाषा के दायरे को भी बढ़ाया है। अब जहां खनन गतिविधियां होती हैं, वहां से 15 किलोमीटर तक के क्षेत्र को प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र माना जाएगा, जबकि पहले यह सीमा केवल पांच किलोमीटर थी। इसके अलावा 15 से 25 किलोमीटर तक के क्षेत्र को अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र की श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में डीएमएफ फंड का उपयोग विभिन्न जनकल्याणकारी और विकासात्मक कार्यों के लिए किया जाता है।उन्होंने कहा कि डीएमएफ ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य खनन गतिविधियों से प्रभावित लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास को सुनिश्चित करना है। खनन कार्यों से पर्यावरण, जल स्रोतों, कृषि भूमि और स्थानीय जीवन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों की भरपाई के लिए इस ट्रस्ट के माध्यम से विभिन्न योजनाएं लागू की जाती हैं।
डीएमएफ के तहत शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता, आजीविका विकास तथा महिला एवं बाल कल्याण जैसे क्षेत्रों में योजनाएं संचालित की जाती हैं। खनन प्रभावित गांवों में स्कूल और स्वास्थ्य सुविधाओं का सुदृढ़ीकरण, पेयजल योजनाओं का निर्माण, वृक्षारोपण, कौशल विकास प्रशिक्षण तथा जरूरतमंद परिवारों को सहायता प्रदान करने जैसे कार्य भी इसी फंड से किए जाते हैं।
बैठक में अतिरिक्त उपायुक्त सचिन शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. यशपाल रांटा, जीएमडीआईसी संजय कंवर, जिला योजना अधिकारी निवेदिता सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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Shimla Deputy Commissioner
Chandrika
